Ashfaq Ahmad
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फिल्म समीक्षा: वर्ड्स ऑन बाथरूम वाल्स

 


"कमियां हम सबमे है, उन्हें मान लेने से हमे मिल जाता है मौका और साथ ही हिम्मत भी, उनसे लड़ने के लिए ।"


बीमारियां इंसान का व्यक्तित्व बदल कर रख देती हैं ।


यह मूवी एक मानसिक डिसऑर्डर पर बनी हैं। यह बीमारी केमिकल लोचे से होती हैं।  इसकी वजह से आवाजे सुनाई देती है और वो चीजे नज़र आती है जो असल मे होती नही हैं, लेकिन दिमाग मे चलती रहती हैं ।


एडम एक प्रतिभाशाली युवा हैं जो पाक कला में निपुण है और किसी प्रतिष्ठित पाक कला केंद्र में प्रवेश लेकर शेफ बनना चाहता हैं। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर होता हैं ।


एडम को सिजोफ्रेनिया डायग्नोज होता हैं ।


स्कूल लेब में हुई एक दुर्घटना की वजह से एडम को स्कूल से निकाल दिया जाता हैं। एक अन्य स्कूल में मुश्किल से एडमिशन मिलता हैं । लेकिन वहाँ भी बीमारी की वजह से उसे सस्पेंड कर दिया जाता हैं । एडम का शेफ बनने का सपना सिजोफ्रेनिया की वजह से टूटता हुआ नजर आता हैं।


इस बीमारी से ग्रसित इंसान को हिंसक और पागल दिखाया जाता हैं । लेकिन इस मूवी का नायक एडम हिंसक नही और पागल भी नही । वो बहुत सॉफ्ट नेचर का इंसान है लेकिन जब उस पर डिसऑर्डर हावी होने लगता है तब वो नॉर्मल नही रहता। लेकिन किसी को नुकसान भी नही पहुँचाता ।


युवावस्था में किसी बीमारी का साथ लग जाना लाइफ को सामान्य नही रहने देता । एडम के साथ यही होता है इसलिए वो खुद को अपनो से अलग करने लगता हैं...अपनी प्रेमिका से भी ।


मूवी में एडम अपनी कहानी एक मनोचिकित्सक को सुनाता है । यह मनोचिकित्सक कभी नज़र नही आता । लगता है एडम अपनी कहानी हमे सुना रहा हैं। 


सिजोफ्रेनिया की वजह से एडम को मकड़ी के जाले जैसे काले धुंए के साथ डराती हुई आवाज, जिसमे आसपास का नज़ारा धुंधला होने लगता हैं । इसके साथ तीन अलग अलग व्यक्तित्व के लोग उसे अपनी बात मनवाने के लिए बाध्य करते हुए नज़र आते हैं। जिनमे एक परी जैसी लड़कीं, दूसरा एक चंचल आशिक और तीसरा बेसबॉल बेट लिए दुसरो को हमेशा मारने के लिए तत्पर एक पहलवान । 


एडम दवाइयां लेना शुरू करता है लेकिन उसके साइड इफ़ेक्ट इतने ज्यादा होते है कि उसकी नॉर्मल लाइफ प्रभावित होने लगती हैं।  इसे आप मूवी देखते समय समझेंगे। 


इस बीमारी में लगातार जूझते रहना और उसके साथ अपना जीवन  गुजारना एडम की नियति बन जाता हैं ।


जब किसी को कैंसर होता है तो लोग उसकी अंतिम इच्छा को पूरी करने में लग जाते है और जब किसी को सिजोफ्रेनिया हो तो सब लोग उसे बड़ी परेशानी के रूप में देखने लगते हैं ।


मूवी में एडम का करिश्माई अभिनय गजब का नज़र आता है जब वो अपने बदलते मिज़ाज़ के साथ उसे पर्दे पर प्रस्तुत करता हैं। सामान्य मिज़ाज़ और बीमारी की वजह से बदलते मिज़ाज़ का तालमेल...इसमे किया गया अभिनय तारीफ के काबिल हैं ।


मूवी में स्कूल लेब का दृश्य, प्रिंसिपल के सर पर आग लगने का दृश्य और लास्ट स्पीच वाला दृश्य लाजवाब हैं । इन दृश्यों में मास्टरपीस सिनेमेटोग्राफी नज़र आती है और एडम का शानदार अभिनय भी । कई अन्य दृश्य भी देखने लायक हैं ।


मूवी बढ़िया स्क्रिप्ट के साथ हैं । अभिनय, लाजवाब फिल्मांकन और स्क्रीन प्ले के लिए मस्ट वाच हैं। 


मूवी में बीमारी के फिल्मांकन और उसे प्रस्तुत करने का तरीका मुझे बहुत अच्छा लगा । मूवी बीमारी और इसके इलाज की सफलता और असफलता को बढ़िया से प्रस्तुत करती हैं।  


"अपनी सबसे बड़ी कमी है, खुद से छिपना ।"


किसी बीमारी से ग्रसित इंसान की मानसिक, शारीरिक और सामाजिक जिंदगी किस तरफ प्रभावित होती है, उसे एडम के किरदार से अच्छे से समझा जा सकता हैं ।


बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री परवीन बॉबी भी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थी । इसी विषय पर बनी ब्यूटीफुल माइंड भी देखने योग्य मूवी हैं ।


शुक्रिया । 💫


Words on Bathroom Walls (2020)

Hindi English

Romance/Drama 

1h 50m

7.2/10

Prime Video


#wordsonbathroomswalls 

#moviereview



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