Ashfaq Ahmad
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अरल्ज़वर्स: पृथ्वी के अतीत से ब्रह्मांड की सीमाओं तक जाती एक विराट कथा-यात्रा

 


पृथ्वी के अतीत से ब्रह्मांड की सीमाओं तक जाती एक विराट कथा-यात्रा

कुछ कथा-संसार ऐसे होते हैं जो अपनी शुरुआत में जितने सीमित दिखाई देते हैं, आगे बढ़ते-बढ़ते उतने ही विशाल होते चले जाते हैं। अर्ल्ज़वर्स (Arlzverse) भी इसी तरह की एक दीर्घ कथा-परिकल्पना है। इसकी शुरुआत किसी बहुत दूर स्थित आकाशगंगा से नहीं, बल्कि मनुष्य, पृथ्वी और समय से जुड़े रहस्यों से होती है; लेकिन चार अलग-अलग कथाओं से गुजरते हुए इसका विस्तार पृथ्वी के भूले हुए अतीत से लेकर उन संसारों तक पहुँच जाता है जो पृथ्वी से बाहर अस्तित्व में हैं।

मिरोव (Mirov), ओरियन (Orion), विलाद (Vilaad) और इक्वोडो (Equodo)—ये चार कथाएँ मिलकर तीस पुस्तकों की उस संरचना का निर्माण करती हैं जिसमें समय, विलुप्त सभ्यताएँ, विभिन्न बुद्धिमान प्रजातियाँ, बाहरी शक्तियाँ और ब्रह्मांडीय संघर्ष धीरे-धीरे एक-दूसरे से जुड़ते जाते हैं।

इस कथा-संसार की सबसे दिलचस्प विशेषता शायद यही है कि यह पाठक के सामने अपना पूरा विस्तार एक साथ नहीं रखता। हर अगली कहानी पिछली कहानी से कहीं बड़ा परिप्रेक्ष्य खोलती है। जो रहस्य पहले किसी एक व्यक्ति या किसी एक घटना तक सीमित लगता है, वह आगे चलकर पृथ्वी के इतिहास, फिर पृथ्वी पर जीवन के विकास और अंततः अनेक ग्रहों तथा सभ्यताओं के संघर्ष से जुड़ जाता है।


जब पृथ्वी का अतीत स्वयं एक रहस्य बन जाए

यदि मिरोव अर्ल्ज़वर्स में समय और छिपी हुई वास्तविकताओं के रहस्यों का दरवाज़ा खोलता है, तो ओरियन उस दरवाज़े से पाठक को पृथ्वी के उस अतीत में ले जाता है, जिसे मनुष्य ने कभी दर्ज ही नहीं किया।

पंद्रह भागों में फैली ओरियन की शुरुआत एथेंस से होती है, जहाँ क्रिसमस के अगले दिन एक सार्वजनिक चौक के बीच एक कटा हुआ हाथ मिलता है। लेकिन यह कोई सामान्य हाथ नहीं है। वह जीवित है और उसका आकार इस ओर संकेत करता है कि वह किसी ऐसे विशाल जीव का अंग है, जिसका आधुनिक संसार में अस्तित्व होना ही असंभव माना जाएगा।

यहीं से कहानी व्यक्तिगत रहस्य से उठकर समय के एक बड़े प्रश्न की ओर बढ़ती है।

नायक को अपने परिवार से जुड़े ऐसे संकेत मिलते हैं जिनसे पता चलता है कि उसके परदादा को उसके जीवन में आने वाली प्रमुख घटनाओं का किसी असाधारण तरीके से पूर्वज्ञान था। पीछे छोड़े गए निर्देश उसे बेलिज्रेंट ब्लूज से संपर्क स्थापित करने जैसे कार्य की ओर ले जाते हैं। धीरे-धीरे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल पारिवारिक रहस्य नहीं, बल्कि कहीं अधिक बड़ी योजना की शुरुआत है।

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चालीस हजार वर्ष पीछे जाने वाली कहानी

ओरियन का सबसे बड़ा आकर्षण उसका समय-परिवर्तन है।

भविष्य में पृथ्वी की वास्तविक समयरेखा देखने के बाद पात्रों को एक ऐसी दुनिया का पता चलता है जहाँ ग्रह पूरी तरह बदल चुका है और वर्तमान जीवन-रूप समाप्त हो चुके हैं। इस भविष्य को रोकने के लिए इक्कीस लोगों को लगभग चालीस हजार वर्ष अतीत में भेजने की योजना बनती है।

लेकिन उससे पहले उन्हें दो अन्य अभियानों से गुजरना पड़ता है— एक लगभग पाँच सौ वर्ष पुराने कैनरी द्वीपों में, और दूसरा हिटलर के उदय के समय ऑस्ट्रिया में। दोनों अभियान मुख्य मिशन से पहले उनकी शारीरिक और मानसिक तैयारी का हिस्सा बनते हैं।

और जब वे अंततः चालीस हजार वर्ष पुराने पृथ्वी-काल में पहुँचते हैं, तो उनके सामने वह पृथ्वी नहीं होती जिसे वे जानते हैं।

वहाँ हमंस और सैटंस जैसी दो अलग प्रजातियाँ भूमध्यसागरीय और अटलांटिक क्षेत्रों में विकसित हो चुकी हैं। दोनों की सभ्यता का स्तर अलग है। Hamans अपेक्षाकृत कम विकसित अवस्था में हैं, जबकि Satans कहीं अधिक उन्नत सभ्यता तक पहुँच चुके हैं। समय-यात्री अब केवल अतीत में जीवित रहने का प्रयास नहीं कर रहे; उन्हें दो अलग सभ्यताओं के बीच रहते हुए अपने मिशन को पूरा करना है।

यहीं ओरियन एक सामान्य टाइम ट्रेवल रोमांच से आगे निकलती दिखाई देती है।


मिथक जब इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं

ओरियन की दुनिया में वे जीव भी वास्तविक हैं जिन्हें आधुनिक मनुष्य मिथक और किंवदंतियों का हिस्सा मानता आया है।

प्राचीन पृथ्वी में समय-यात्री ऐसे जीवों से परिचित होते हैं जिनके अस्तित्व को आधुनिक दुनिया असंभव मानती है। कथा में यह संभावना सामने आती है कि प्राचीन मिथकों के पीछे वास्तव में उन जीवों के साथ हुए वास्तविक एनकाउंटर्स हो सकते हैं, जो बाद में पृथ्वी से विलुप्त हो गए।

इस स्तर पर कहानी का आकर्षण केवल इस बात में नहीं है कि अनुनाकी, नेफिलिम, साईक्लॉप्स और ड्रैगन्स वास्तविक दुनिया का हिस्सा बन जाते हैं। असली दिलचस्पी इस बात में है कि कथा इन मिथकीय तत्वों को एक ऐसे प्राचीन इतिहास में रखती है जहाँ सभ्यताएँ, प्रजातियाँ और युद्ध पहले से मौजूद हैं।

और तभी एक और परत सामने आती है।

इस दुनिया में एक विशाल युद्ध पहले ही बहुत बड़ी आबादी को नष्ट कर चुका है। फिर भविष्य से आए कुछ लोग उसी कालखंड में पहुँचते हैं, जो भविष्य को बदलने से रोकना चाहते हैं। परिणामस्वरूप एक और बड़ा संघर्ष जन्म लेता है।

इस तरह ओरियन का अतीत स्वयं भविष्य से प्रभावित होने लगता है।

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विलाद: जब कहानी और भी पीछे चली जाती है

यदि ओरियन पाठक को चालीस हजार वर्ष पीछे ले जाती है, तो Vilaad उससे भी आगे जाने का निर्णय करती है।

यह कहानी लगभग सत्तर हजार वर्ष पूर्व की पृथ्वी पर घटित होती है और उस काल को सामने लाती है जब दो एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल प्रजातियों से जुड़ा पहला बड़ा युद्ध पृथ्वी के इतिहास को प्रभावित करता है। इस संघर्ष में विकसित हो रहे हमंस और सैटंस भी शामिल हो जाते हैं।

लेकिन विलाद की कहानी केवल दो प्रजातियों की लड़ाई नहीं है।

इसके केंद्र में इक्वोडियंस हैं, जिनकी भूमिका पृथ्वी पर जीवन के निर्माण, उसकी संरचना और उसके रिफ़ाइन्मेन्ट से जुड़ी है। दूसरी ओर हमंस अभी जंगलों में रहने वाली अपेक्षाकृत आदिम अवस्था में हैं, जबकि सैटंस स्थायी बस्तियों और संगठित राज्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

हमंस को शोषण, दासता और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। लेकिन कहानी में उनका विकास केवल जैविक या सभ्यतागत नहीं है; धीरे-धीरे उनमें आत्मबोध और अपने अस्तित्व के प्रति विश्वास पैदा होता है। अंततः वे अधीन बने रहने से इनकार करते हैं और हमंस तथा सैटंस के बीच संबंध संघर्ष में बदल जाते हैं।

यहीं विलाद का राजनीतिक और सामाजिक पक्ष अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।


पृथ्वी के नीचे का युद्ध ही पूरी कहानी नहीं है

विलाद में पृथ्वी पर चल रहे संघर्ष के समानांतर एक दूसरी लड़ाई भी चल रही है।

एक बायोशिप पृथ्वी पर पहुँचता है। उससे जुड़े पक्षों में इक्वोडियंस, जिन्हें कहानी में एंजेल्स से जोड़ा गया है, और हेलब्रीड्स, जिन्हें डेविल्स से संबद्ध किया गया है, आमने-सामने हैं। इक्वोडियंस उसे रोकना चाहते हैं, जबकि हेलब्रीड्स उसे सक्रिय करने का प्रयास करते हैं।

इससे कहानी में दो युद्ध एक-दूसरे में जुड़ जाते हैं—

एक ओर हमंस और सैटंस का संघर्ष,
और दूसरी ओर इक्वोडियंस तथा हेलब्रीड्स का संघर्ष।

इन दोनों संघर्षों का पृथ्वी के भविष्य से संबंध है।

इस दृष्टि से विलाद केवल ओरियन की पृष्ठभूमि नहीं बनती; वह उस इतिहास की एक और पुरानी परत खोलती है जिसके परिणाम बाद की घटनाओं में दिखाई देते हैं।

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और फिर अर्ल्ज़वर्स पृथ्वी से बाहर निकल जाता है

यहीं आकर इक्वोडो पूरी संरचना का सबसे बड़ा विस्तार प्रस्तुत करती है।

मिरोव, ओरियन और विलाद मुख्यतः पृथ्वी के अतीत, वर्तमान और भविष्य से जुड़ी हुई कहानियाँ हैं। इक्वोडो इस सीमा को तोड़ देती है।

यह कहानी पृथ्वी से शुरू ही नहीं होती।

यह अलग-अलग ग्रहों और अलग-अलग प्रकार के बुद्धिमान जीवन से भरे संसारों में प्रवेश करती है। यहाँ पहली बार पाठक को ऐसा दृष्टिकोण मिलता है जिसमें मनुष्य इस विशाल व्यवस्था का केंद्र नहीं रह जाता। दूसरे जीवों और सभ्यताओं के अपने इतिहास, पहचान, संघर्ष और अस्तित्व संबंधी धारणाएँ हैं।

यहीं फ़िएन्डर्स, हेलिडर्स और वूडर्स/इक्वोडियंस जैसी शक्तियाँ कथा-संसार को पृथ्वी से बहुत आगे ले जाती हैं।

फ़िएन्डर्स, हेलिडर्स से जुड़े हुए जीव हैं, जबकि  वूडर्स/इक्वोडियंस विभिन्न ग्रहों पर जीवन के अलग-अलग रूपों के निर्माण से संबंधित हैं। इस स्तर पर अर्ल्ज़वर्स का मूल प्रश्न ही बदलने लगता है।

अब प्रश्न केवल यह नहीं रह जाता कि पृथ्वी पर जीवन कैसे विकसित हुआ।

प्रश्न यह भी है कि जीवन को बनाने, बदलने और नियंत्रित करने का अधिकार किसके पास है?


थ्य ओ रॉन: देवत्व का दावा करने वाली शक्ति

इक्वोडो में एक नई शक्ति प्रवेश करती है— थ्य ओ रॉन।

वह स्वयं को ईश्वर कहता है।

उसके पास असाधारण शक्तियाँ हैं और उसका उद्देश्य पूरे ब्रह्मांड में मौजूद जीवन को अपने नियंत्रण में लाना है। वह मौजूदा जीवन-रूपों और ग्रहों को अपूर्ण मानता है और उन्हें सुधारकर अपने अनुसार बेहतर बनाने की इच्छा रखता है।

लेकिन इक्वोडो को दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि कथा किसी एक पक्ष को सरलता से अंतिम सत्य घोषित नहीं करती।

मनुष्य की दृष्टि से वूडर्स देवदूत और हेलब्रीड्स दैत्य हो सकते हैं। लेकिन फ़िएन्डर्स और हेलिडर्स के दृष्टिकोण से यही समीकरण उलट जाता है। उनके लिए वूडर्स दैत्य हैं, जबकि उनके द्वारा बनाए गए मनुष्य जैसे जीव महत्वहीन हैं।

यहाँ अर्ल्ज़वर्स अपनी कथा को एक महत्वपूर्ण विचार तक ले जाता है:

जिसे एक प्रजाति ईश्वर मानती है, दूसरी उसे शत्रु मान सकती है।

और जिसे कोई प्रजाति महत्वहीन समझती है, वह दूसरी दृष्टि से पूरी कहानी का केंद्र हो सकता है।


एक कहानी से आकाशगंगाओं तक

इक्वोडो में संघर्ष अंततः दो बड़ी आकाशगंगाओं और एक विलुप्त वूडर सभ्यता के अवशेषों तक पहुँचता है।

एक ओर नेलिडो आकाशगंगा है, जहाँ हेलब्रीड्स द्वारा निर्मित फ़िएन्डर्स रहते हैं।

दूसरी ओर ससेन आकाशगंगा है, जहाँ वूडर्स द्वारा बनाए गए मनुष्य-सदृश जीव रहते हैं।

और तीसरी शक्ति उन विलुप्त वूडर्स के अवशेष हैं, जो पृथ्वी से अपहृत किए गए प्राणियों की सहायता से स्वयं को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं।

थ्य ओ रॉन इस संघर्ष से बाहर खड़ा कोई निष्पक्ष निरीक्षक नहीं रहता। वह प्रमुख पात्रों के अतीत में हस्तक्षेप करता है और घटनाओं की दिशा बदलने का प्रयास करता है।

उसका उद्देश्य केवल किसी विनाश को रोकना नहीं है।

वह स्वयं को हजारों विकसित सभ्यताओं के बीच सर्वोच्च दैवी शक्ति के रूप में स्थापित करने की संभावना भी तलाशता है।

इससे इक्वोडो का संघर्ष व्यक्तिगत स्तर से कहीं आगे जाकर ब्रह्मांडीय स्तर प्राप्त कर लेता है।


अर्ल्ज़वर्स की सबसे बड़ी विशेषता: विस्तार

अर्ल्ज़वर्स को पढ़ते हुए सबसे उल्लेखनीय बात इसकी लगातार बढ़ती हुई व्यापकता है।

मिरोव एक व्यक्ति के असंभव जागरण और समय तथा छिपी हुई वास्तविकताओं के रहस्यों से शुरुआत करता है।

ओरियन उस रहस्य को पृथ्वी के चालीस हजार वर्ष पुराने अतीत में ले जाती है।

विलाड उससे भी पीछे, लगभग सत्तर हजार वर्ष पहले जाकर यह दिखाती है कि पृथ्वी पर बुद्धिमान प्रजातियों और परग्रही शक्तियों के बीच संघर्ष किस तरह विकसित हुआ।

और इक्वोडो अंततः पृथ्वी की सीमा ही हटा देती है और कथा को दूसरे ग्रहों, दूसरी प्रजातियों और आकाशगंगाओं के संघर्ष में पहुँचा देती है।

इसलिए इन चारों कहानियों को अलग-अलग पढ़ना संभव होने के बावजूद, इन्हें साथ देखने पर इनका वास्तविक आकार अधिक स्पष्ट होता है।

यह केवल चार अलग-अलग विज्ञान-कथा और फंतासी रोमांचक कथाओं का संग्रह नहीं रह जाता।

यह एक ऐसी क्रमिक कथा-रचना बन जाती है जिसमें एक रहस्य दूसरे इतिहास को जन्म देता है और एक इतिहास आगे चलकर दूसरे ब्रह्मांडीय संघर्ष की भूमिका तैयार करता है।

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तीस किताबें, चार कथाएँ और एक जुड़ा हुआ इतिहास

मिरोव, ओरियन, विलाद और इक्वोडो मिलकर अर्ल्ज़वर्स की चार प्रमुख कथाएँ बनाती हैं।

इनका विस्तार कुछ इस तरह दिखाई देता है:

मिरोव— व्यक्ति, समय और छिपी हुई वास्तविकताओं के रहस्य।

ओरियन— चालीस हजार वर्ष पुरानी पृथ्वी, विलुप्त सभ्यताएँ और मिथकीय जीवों की वास्तविक दुनिया।

विलाद— सत्तर हजार वर्ष पुराना पृथ्वी-इतिहास, हमंस और सैटन्स का विकास तथा इक्वोडियन्स और हेलब्रीड्स का संघर्ष।

इक्वोडो— पृथ्वी से बाहर का ब्रह्मांड, अलग-अलग ग्रहों की सभ्यताएँ, फ़िएन्डर्स, हेलिडर्स, वूडर्स और थ्य ओ रॉन का व्यापक संघर्ष।

यही क्रम इस पूरी रचना को एक अलग पहचान देता है।

कथा लगातार फैलती जाती है।

पहले व्यक्ति।

फिर पृथ्वी।

फिर पृथ्वी का अतीत।

फिर पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और प्रजातियों का संघर्ष।

और अंततः पूरा ब्रह्मांड।

क्या अर्ल्ज़वर्स वास्तव में एक ही कहानी है?

शायद इसका सबसे उचित उत्तर यह है कि यह एक कहानी से अधिक एक जुड़ा हुआ इतिहास है।

हर कथा अपने भीतर एक अलग संसार खोलती है, लेकिन उनके बीच संबंध धीरे-धीरे सामने आते हैं। अतीत भविष्य को प्रभावित करता है, भविष्य अतीत में हस्तक्षेप करता है, विलुप्त सभ्यताएँ अपने पीछे प्रभाव छोड़ती हैं और पृथ्वी से बहुत दूर होने वाली घटनाएँ अंततः उस दुनिया से जुड़ जाती हैं जहाँ से यह यात्रा शुरू हुई थी।

यही इसकी सबसे बड़ी कथा-शक्ति भी है।

अर्ल्ज़वर्स का विस्तार केवल स्थान का विस्तार नहीं है।

यह समय का विस्तार है, इतिहास का विस्तार है, प्रजातियों की अवधारणा का विस्तार है और अंततः दृष्टिकोण का विस्तार है।

शुरुआत में पाठक मनुष्य की आँखों से रहस्य देखता है।

फिर वह प्राचीन पृथ्वी के जीवों और सभ्यताओं को देखता है।

फिर वह समझता है कि पृथ्वी पर जीवन का इतिहास उससे कहीं अधिक जटिल है जितना आधुनिक मनुष्य जानता है और अंततः वह ऐसे संसार में पहुँचता है जहाँ मनुष्य स्वयं ब्रह्मांड की असंख्य बुद्धिमान प्रजातियों में केवल एक है।

यही कारण है कि अर्ल्ज़वर्स की तीस पुस्तकों को केवल अलग-अलग रोमांचक कथाओं के रूप में देखना इसके वास्तविक विस्तार को छोटा कर देना होगा।

यह चार कथाओं में धीरे-धीरे खुलता हुआ एक ऐसा काल्पनिक ब्रह्मांड है, जिसमें समय पीछे भी जाता है, आगे भी लौटता है और अंततः पृथ्वी की सीमाएँ पार करके ब्रह्मांड तक पहुँच जाता है।



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