फिल्म समीक्षा: बाइसेन्टेनिअल मैंन

 


क्या कोई रोबोट इंसान जैसा बन सकता हैं । इंसानो की तरह फ्रीडम और अपने अधिकारों की चाहत रख सकता हैं ?

यह मूवी रोबोट से इंसान बनने के सफर पर आधारित है, इस सफर को पूरा होने में दो सदी लग जाती हैं । एक ऐसा इंसान जो दो सौ साल तक जिया ।

NDR के एक रोबोट को मार्टिन अपने घर के कामकाज करने के लिए खरीदता हैं । रोबोट बहुत कुशल तरीके से अपना काम संभाल लेता हैं ।

एक बार मार्टिन रोबोट को म्यूजिक सुनते हुए देखता है और चौंक जाता हैं। इसके साथ ही मार्टिन को एंड्रयू की विशेष क्षमता का पता चलता है जब उसके हाथों से कांच का एक खिलौना टूट जाता है और वह बिल्कुल उसी तरह का खिलौना लकड़ी से बना देता हैं । 

इस रोबोट का न्यूरोपाथवे अन्य रोबोट से बिल्कुल अलग हैं, इसलिए यह सबसे यूनिक रोबोट हैं । इसमे कई चीजें इंसानो की तरह हैं । यह बिल्कुल इंसानो की तरह व्यवहार और काम करता हैं । मार्टिन इस रोबोट को एंड्रयू नाम देता हैं ।

मार्टिन एंड्रयू की कार्यक्षमता और रचनात्मकता से प्रभावित होकर उसे घड़ी बनाने का काम सीखा देता हैं । एंड्रयू इस काम से काफी पैसा कमाता हैं । मार्टिन एंड्रयू की इस कमाई पर कोई हक नही रखता, एंड्रयू का एक बैंक अकाउंट खुलवाकर सारी कमाई उसी में जमा करवाने लगता हैं ।

मार्टिन एंड्रयू को वो सब भी सिखाता है जो एक इंसान को सीखना चाहिए । 

एंड्रयू लिटिल मिस से पियानो बनाना भी सीख जाता हैं । इंसानो की तरह कपड़े पहनने लगता हैं ।
मार्टिन एंड्रयू के साथ बहुत अच्छा व्यवहार करता है । एंड्रयू उसके परिवार का हिस्सा बन जाता हैं । मार्टिन के जरिये एंड्रयू अनेको किताबो का अध्ययन करता है और काफी जानकारी हासिल कर लेता हैं । 

"ज्यादा जानकारी से इंसान काम्प्लेक्स होने लगता हैं ।"

इंसानो का इतिहास जानने के बाद एंड्रयू यह समझता है कि मानव इतिहास रक्तरंजित रहा है । सभी लड़ाइयां फ्रीडम पाने के लिए लड़ी गई हैं । उसे लगने लगता है कि फ्रीडम बहुत जरूरी चीज है । अब एंड्रयू के मन मे भी फ्रीडम पाने की इच्छा होने लगती हैं । 

अपनी इस इच्छा को पूरी करने के लिए एंड्रयू अपने द्वारा अर्जित सारी सम्पति के बदले मार्टिन से अपनी फ्रीडम की गुजारिश करता हैं। 

एक इंसान भी ज्ञान हासिल करने के बाद फ्रीडम और अधिकारों की मांग ही करेगा, एंड्रयू तो फिर भी एक रोबोट हैं ।

मार्टिन एंड्रयू को आज़ाद कर देता है, बिना उसकी सम्पति लिए । 

एंड्रयू समुन्द्र तट के पास अपना आशियाना बनाता हैं ।

आगे मूवी चलती है लेकिन काफी धीमी गति से, बस मुझे मूवी में यही सबसे बड़ी कमी लगी ।  मूवी 200 साल तक चलेगी तो धीमी होगी ही । 😁

एंड्रयू का मार्टिन की छोटी बेटी मिस लिटिल से काफी भावनात्मक लगाव बन जाता है जो मूवी के अंत तक उसकी तीसरी पीढ़ी तक रहता हैं ।

जैसे जैसे मूवी आगे बढ़ती है वेसे वेसे ही एंड्रयू का दिमाग इंसानो की तरह काम करने लगता हैं ।
"रोबोट के मुकाबले इंसान ज्यादा उलझे हुए होते हैं ।"

एंड्रयू NDR डिज़ाइनर के बेटे रूपर्ट से मिलकर अपने आपको अपग्रेड कर लेता हैं । अब एंड्रयू खाने पीने, भावनाओ को महसूस करने और यहाँ तक कि यौन सम्बन्ध बनाने की क्षमता भी हासिल कर लेता हैं और बिल्कुल इंसानो की तरह दिखने लगता हैं।  

एंड्रयू को लिटिल मिस की ग्रांड डॉटर पोर्शिया से प्यार हो जाता हैं क्योकि वो हूबहू मिस लिटिल जैसी ही लगती हैं । एंड्रयू को मिस लिटिल से प्यार था, लेकिन रोबोट और इंसान में शादी नही हो सकती ।
लेकिन अब एंड्रयू अपग्रेड हो गया है और उसका शरीर बिल्कुल एक इंसान की तरह काम करने लगा हैं । इसलिए अब एंड्रयू इंसान होने मान्यता के साथ पोर्शिया से शादी करना चाहता है, लेकिन उसे इंसान होने की मान्यता नही मिलती ।

कोर्ट में इंसान और रोबोट में फर्क के एंड्रयू के सवाल जवाब भी सुनने लायक हैं। 

"कोई मशीन कभी इंसान नही बन सकती ।"

अगर किसी इंसान के शरीर मे ऐसे उपकरण लगे है जो उसके शरीर को चला रहे है, अब उसे इंसान कहना उचित होगा या रोबोट ?

इधर एंड्रयू की उम्र 200 साल तक पहुचने के करीब होने के बावजूद एंड्रयू युवा बना रहता हैं ।

मार्टिन के जाने के बाद उसकी बेटी मिस लिटिल भी दुनिया से चली जाती हैं और प्रेमिका पोर्शिया भी बूढ़ी हो चुकी है और मशीनों के सहारे जिंदा हैं ।

एंड्रयू एक बार फिर अपने इंसान होने की अपील करता है । इस बार उसे इंसान घोषित कर दिया जाता हैं ।

"रोबोट के रूप मैं हमेशा जी सकता था, लेकिन मशीन बनकर जीने से बेहतर मैं एक इंसान की तरह बनकर मरना पसंद करूंगा ।"

अमर होना एक अभिशाप की तरह है । जब आपके अपने दुनिया से चले जाएँ और आप उनके बगैर तन्हा रह जाओ तो ऐसी जिंदगी जी कर भी क्या करना । आपको जिन इंसानो की परवाह है वो एक दिन आपको छोड़ कर चले जाएंगे ।

जिंदगी जीना का तरीका होना चाहिए, एक निश्चित समय तक अपना जीवन जीकर, जिंदगी छोड़कर चले जाना चाहिए।

एंड्रयू यह बात समझ जाता है और आम इंसानो से बिल्कुल अलग जाकर एंड्रयू मृत्यु के लिए सहज तैयार हो जाता हैं ।

एंड्रयू के मरने के बाद उसके चेहरे जो सुकून नज़र आता है, वो विरले लोगो मे ही मिलता हैं। 
अक्सर इंसान मरना ही नही चाहते और जब मौत आती है तो चेहरे पर अजीब सी बेचैनी रहने लगती है जो रूह निकलने तक बरकरार रहती हैं।  लेकिन यहाँ मामला कुछ अलग हैं। इस सीन में एंड्रयू के चेहरे को नोटिस कीजियेगा ।

200 साल जीवन जीने वाला रोबोट कम इंसान मरते वक्त बिल्कुल सुकून में होता है, शुक्राने अंदाज़ में, जिंदगी से किसी तरह की कोई  शिकायत नही ।

मूवी में कई दृश्यों में भावुक हुआ जा सकता हैं । एंड्रयू के अभिनय के लिए भी मूवी देखने योग्य हैं ।
रोबोट के लिए समय एंडलेस है, जो कभी खत्म नही होगा, लेकिन इंसानो के लिए ऐसा नही हैं ।
एंड्रयू को पता होता है कि इंसानो की तरह होने पर बुढापा, कमजोरियां, बीमारियां और मृत्यु मिलेगी, लेकिन फिर भी वो इंसान बनना चाहता हैं।  

मुझे मूवी में एंड्रयू का सबसे खास गुण स्वीकार्यता लगा, जो कि आजकल के इंसानो में गायब हैं ।
यह मूवी वेसे तो रोबोट पर आधारित है लेकिन एक मशीन से इंसान बनने तक के सफर में एंड्रयू हमे भी इंसान बनने की प्रेरणा दे जाता हैं । एक सभ्य इंसान की तरह जीवन किस तरह जिया जाना चाहिए, यह सीखा जाता हैं ।

क्या एक मशीन को लेकर इमोशनल हुआ जा सकता हैं ?

इंसान होने के लिए केवल भावनाएं या चेतना काफी है या इसके अलावा भी वो सब होना चाहिए जो मूवी में एंड्रयू में नज़र आता हैं ? इसे आप मूवी देखकर समझिए ।

इस दौर में जब हम इंसानो से जोम्बी बनते जा रहे हैं, रोबोट से इंसान बनने का यह सफर देखने योग्य हैं और विचारणीय भी ।

"आपकी सेवा करके खुशी हुई ।"
शुक्रिया । ❤️

Bicentennial Man (1999)
Hindi English
Sci-Fi / Family Drama
12h 12m
6.9/10
Netflix, Prime Video, SonyLiv
(14-08-2026)
#BicentennialMan 
#moviereview


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