Ashfaq Ahmad
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फिल्म समीक्षा: कास्ट अवे

 


जीवन आशा और निराशा के बीच चलने वाली लहरों के समान हैं, कभी बिल्कुल शांत तो कभी बहुत शौर ।

जीवन जीने का अहसास उन्ही पलो में हम महसूस करते हैं, जब जीवन जाने के अनकरीब होता हैं । इन पलो से गुजरने के बाद पता चलता है कि जिंदगी कितनी बेतरतीब हैं । ऐसा ही कुछ होता है मूवी के नायक चक नोलैंड के साथ ।

चक नोलैंड एक कूरियर कंपनी का सिस्टम विश्लेषक हैं । कूरियर कंपनी में होने वाली परेशानियों को सुधारने में उसकी अहम भूमिका हैं । चक का काम टीम को मोटिवेट करना हैं ।

चक अपनी प्रेमिका केली के साथ लम्बी रिलेशनशिप में है, जल्द ही दोनो शादी करने वाले हैं । 

किसी खास इंसान को काम करते हुए देखना बहुत अच्छा लगता हैं । इससे दोनों के कनेक्शन की गहराई का पता चलता हैं । मूवी के एक सीन में केली और चक के इस सीन को देखिए ।

एक विमान यात्रा के दौरान चक का प्लेन क्रैश हो जाता हैं । इसमे सभी यात्री मारे जाते हैं । एकमात्र चक बचता हैं ।

हर बात में जल्दी करने वाले इंसान के जिंदगी भी गजब के मज़े लेती हैं। उसे उठाकर एकदम सुनसान जगह पर डाल देती हैं। चक के साथ ऐसा ही होता हैं ।........लो अब करो और जल्दी ।

आगे पूरी मूवी इसी पर है कि उस अनजान निर्जन टापू पर चक किस तरह सर्वाइव करता हैं।  मूवी में यही देखने लायक हैं । यहाँ चक का अभिनय, स्टोरी, फिल्मांकन और डायरेक्शन तारीफ के योग्य हैं । चक के किरदार से काफी कुछ सीखा जा सकता हैं ।

टापू पर पीने के लिए नारियल पानी और खाने के लिए सिर्फ मछलियां और केकड़े हैं, भले ही आपको पसंद हो या न हो । 

सर्वाइवल मोड़ में पहली कंडीशन खुद को बचाने की होती हैं । पसंद और नापसंद सर्वाइवल मोड से बाहर निकलने के बाद की बातें हैं ।

जीवन होने के मायने विपरीत परिस्थितियों में ही मालूम पड़ते हैं, अनुकूल परिस्थितियों में जीवन को हम महसूस नही कर पाते ।

जीवन जीने की वजह ना हो तो मन बहुत जल्दी हार मान लेता हैं ।

केली से विदा लेते समय केली उसे एक हाथ घड़ी देती है जिसमे केली का फोटो लगा होता हैं । चक के पास उस टापू से निकलने की एकमात्र वजह केली होती हैं । उससे मिलने के लिए ही वो टापू पर जिंदा रह पाता हैं ।

चक धीरे धीरे सुनसान टापू पर, किस तरह से एक बिल्कुल अनजान जगह पर सुविधारहित जीवन जिया जाता हैं, सीख लेता हैं । कुदरत कुछ लेती है तो कुछ देती भी हैं ।


इंसान के लिए बेसिक जरूरी पृथ्वी के लगभग हर हिस्से में मौजूद हैं, तलाश करना आना चाहिए ।

इंसान कभी अकेला नही रह सकता, सुनसान जगह तो बिल्कुल भी नही । अकेलापन इंसान को अंदर से तोड़ देता है, इसलिये लहरों के साथ आएं सामान में एक फुटबाल को चक अपना दोस्त बना लेता है और उसका नाम भी देता है - विल्सन । 

विल्सन सिर्फ सुनने वाला दोस्त हैं। उस जगह सुनने वाला भी मिल जाएं तो बहुत हैं।  वेसे आजकल सुनने वाले दोस्त मिलते ही कहाँ हैं । अपनी खुशी, हौसला, निराशा, दर्द, प्यार को बताने के लिए कोई तो सहारा होना चाहिए । शायद ईश्वर की रचना भी इसीलिए हुई होगी ।

अकेलेपन में कितना डर होता है, हल्की से आवाज भी दिल दहलाने वाली लगती हैं। उस टापू पर चक के साथ यही होता हैं । उसे लगता है उसके अलावा भी टापू पर कोई और भी हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि वो आवाजें पेड़ से नारियल गिरने की हैं ।

किसी अनजान के लिए इंसान के दिमाग मे हमेशा डर होता हैं, हकीकत जानने पर वो डर अब डर नही रहता। धर्म के मामले में भी इंसानो का यही हाल हैं ।

टापू पर चक का जीवन पाषाण युग जैसा हो जाता हैं । यहाँ जीवन जीने के लिए संघर्ष करना हैं, वो भी अकेले ।  

जीवन सब कुछ सीखा देता हैं, भले ही आप ना जानते हो ।

चक आग जलाना, भाला बनाकर, मछली पकडना, नारियल खोलकर उसका पानी पीना और केकड़ा को भूनकर खाना, पेड़ के पत्तो से पानी इकठ्ठा करना, सर्दियों से बचने के लिए गुफा का सहारा लेना, दांत में ज्यादा परेशानी होने पर एक पत्थर और आइस स्केट की सहायता से अपना दांत निकाल लेना, इत्यादि सब सीख जाता हैं । 

आग के आविष्कार की खुशी वाला दृश्य देखने लायक हैं । एक उम्मीद जगाता हैं, जिंदगी में अभी काफी कुछ करना बाकी हैं ।

जीवन जीने की ललक इंसान से हर काम करवा लेती है ।

चक अपने जीवन के चार साल उस टापू पर गुजारता हैं
चार साल में चक का गेटअप बिल्कुल बदल चुका होता हैं । पहले वो मोटा था । उसे मछली पकड़ने भी नही आता था । लेकिन अब वो पतला और सटीक निशाने वाला बन जाता हैं । चक को देखकर लगने लगता है यह आदिवासी यहीं का स्थाई निवासी हैं ।

घर जाने की उम्मीद हमेशा प्रेरणा देती हैं ।


काफी समय गुजारकर चक मौसम की चाल को समझ जाता है और ठीक समय का इंतेज़ार कर वहाँ से निकलने की तैयारी करता हैं ।

इसके लिए चक लकड़ियों का एक बड़ा बेड़ा बनाता हैं और अनुकूल समय देखकर टापू से निकल जाता हैं । रास्ते मे भयंकर तूफान से बेड़ा खराब हो जाता है और उसका जिगरी विल्सन भी उससे अलग हो जाता हैं ।  

इमोशनल कनेक्शन सुख के साथ दुःख भी बहुत देता हैं । विल्सन के बिछुड़ने से चक टूट जाता हैं और हताश होकर अपनी सारी उम्मीदे छोड़ देता हैं ।

जब कर्म काम न करे तो भाग्य पर भरोसा करना पड़ता हैं । चक का भाग्य साथ देता है और वो वहाँ से गुजर रहे एक जहाज़ की नज़र में आ जाता हैं ।

जीवन मे जिजीविषा का होना बहुत जरूरी है । अगर ये ना हो तो खुशहाल जीवन में भी मृत्य के दर्शन किए जा सकते हैं और अगर यह हो तो मौत के मुँह से भी बाहर निकला जा सकता हैं । इसके साथ यदि जीवन का मकसद जोड़ ले तो उसके सहारे किसी भी तरह की परेशानी से बाहर निकला जा सकता हैं ।

मूवी के कई दृश्य बहुत ही शानदार हैं, जिनमे जीवन जीने की झलक और प्रेरणा मिलती हैं। कुछ दृश्य निःशब्द भी कर देते हैं ।

टापू से निकलने वक्त चक के चेहरे को देखिए...कितनी खुशी है उसके चेहरे पर । वापिस लौटना कितना सुखद अहसास देता हैं ।

खाली समय मे जो साथ निभाए, वही सबसे ज्यादा प्यारा बन जाता हैं । मूवी में वो विल्सन होता हैं ।

विल्सन से बिछड़ने का दृश्य बहुत भावुकता से भरा है, ऐसा लगता है कि चक का कोई हिस्सा उससे अलग हो गया हैं । जिसने उसका इतना साथ दिया वो उसको बचा नही सका, इसके लिए वो माफी भी मांगता हैं । असल माफी और शुक्रगुजारी यहीं से बाहर निकलती हैं । 

वापिस लौटने के बाद चक जब एक टेबल पर रखे विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में केकड़े के एक पीस को हाथ मे लेकर देखता है और लाइटर को ऑन ऑफ करके आग को देखता है तो सोचता है कि कभी इनके लिए मेने कितना संघर्ष किया था और आज......

आसानी से मिलने वाली चीजो की कद्र नही और जो ना मिले वो बेशकीमती हो जाती हैं । कुछ मिलने के बाद उसकी बेकद्री करना हम इंसानो की फितरत है । इसमे बुरा क्या हैं ? 

एक दृश्य में कमरे में चक लाइट को ऑन ऑफ कर उस अंधेरे को फिर से महसूस करता है जो उसने उस टापू पर, गुफा में महसूस किया था और केली की तस्वीर को भी देखता हैं, जिसे वो उस टापू पर अंधेरे और कड़कती बिजली की रोशनी में देखा करता था । टापू पर एक उम्मीद थी लेकिन अब यहाँ.....

जो इंसान किसी तरह से ऐसी जगह से बच कर आया हो, जहाँ से बच पाना लगभग नामुमकिन सा हो, उस शख्स के लिए पसंद और नापसंद मायने नही रखती । कॉफी वाले दृश्य में देखिएगा ।

मूवी में जहाँ टापू वाले सीन जोश और उम्मीद भरे थे वहीं पर चक के घर लौटने वाले सीन बहुत मार्मिक लगे । एक इंसान अपने चार साल खो कर वापिस अपनी दुनिया मे लौटा हैं । इन दृश्यों में क्या खोया और क्या पाया कि उधेड़बुन में उलझे चक को समझने की कोशिश कीजिए । 

कुछ करना भी चाहे तो नही कर सकते । अपने प्यार को खो देना कितनी तकलीफ देता हैं । अपनो से दूर होने के बाद इंसांन भावनात्मक रूप से टूट जाता हैं ।

"मैं तुम्हे कितना प्यार करता हूं, तुम सोच भी नही सकती ।"

कार की चाबी को देखने का दृश्य और चक के चेहरे को देखिए ।

चक और केली के अलविदा होने का दृश्य भी रुला देता हैं ।

अपने दोस्त से बात करते वक्त टापू पर अपने निराशा के पलों को शेयर करने वाला दृश्य बहुत ही ज्यादा भावुक कर देता हैं ।

जहाँ शुरू में चक बहुत जल्दबाज़ी में रहने वाला इंसान नज़र आता है वहीं पर मूवी के अंत मे वह बहुत शांत, सहज और जिंदगी के पलों को महसूस करने वाला इंसान बन जाता हैं । असल मायनो में जीवन जीने वाला इंसान । छाया की असल कीमत वही समझ सकता है जो धूप में तपकर आया हो । शायद यही मूवी का असल मेसेज हैं ।

जीवन के चौराहे पर खड़ा चक मूवी के अंत मे देखता है कि मुझे अब कहाँ जाना हैं । उसे जिंदगी नज़र आने लगती हैं ।

कहते है की जिंदगी कभी रुकती नही....शायद इसीलिए इसे जिंदगी कहते हैं ।

शुक्रिया 💫

Cast Away (2000)
Hindi, English
Adventure/Action 
2h 23m
7.8/10
Youtube, Prime Video

#castaway

#moviereview

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