Ashfaq Ahmad
हर महीने पाइये अशफ़ाक़ अहमद की मुफ्त थ्रिलर ई-बुक्स!
अभी फॉलो करें: Amazon • Goodreads • Bookbub •:

ओरियन: जब पृथ्वी का अतीत स्वयं एक अनजान संसार बन जाए

 


पृथ्वी का इतिहास मनुष्य जितना जानता है, उससे कहीं अधिक पुराना है। लेकिन यदि उस इतिहास के किसी ऐसे काल में पहुँचा जाए, जिसके बारे में आधुनिक सभ्यता के पास लगभग कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है, तो वहाँ क्या मिलेगा?

ओरियन इसी कल्पना को आधार बनाकर पंद्रह भागों में फैली एक दीर्घ कथा प्रस्तुत करता है। इसकी शुरुआत आधुनिक समय की एक ऐसी घटना से होती है, जो सामान्य तर्क और ज्ञात जीव-जगत— दोनों को चुनौती देती है।


क्रिसमस के बाद मिला जीवित पंजा

एथेंस में क्रिसमस के अगले दिन लोगों को एक चौराहे पर एक कटा हुआ पंजा मिलता है।

पहली दृष्टि में यह किसी विचित्र जीव का अवशेष लगता है, लेकिन समस्या यह है कि वह पंजा मरा हुआ नहीं, बल्कि जीवित है।

उसका आकार भी सामान्य जीव-जगत से उसका संबंध समाप्त कर देता है। वह इतना विशाल है कि उससे जुड़े जीव का आकार किसी दैत्याकार प्राणी जैसा होना चाहिए—और ऐसा प्राणी आधुनिक पृथ्वी पर मौजूद नहीं हो सकता।

यह घटना कथा में केवल रहस्य पैदा करने के लिए नहीं आती। आगे चलकर यही संकेत उस संसार की ओर जाने वाला पहला द्वार बन जाता है, जो आधुनिक मनुष्य की जानकारी से हजारों वर्ष पहले अस्तित्व में था।


एक परिवार के भीतर छिपे भविष्य के निर्देश

इस घटना के बाद कथा का केंद्र उसके नायक की ओर स्थानांतरित होता है।

अपनी दादी और अपने घर से मिले कुछ प्रमाणों के माध्यम से उसे पता चलता है कि उसके परदादा को उसके जीवन की अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी पहले से थी।

यह रहस्य सामान्य पारिवारिक इतिहास से कहीं आगे जाता है।

उसके बचपन से लेकर युवावस्था तक की घटनाओं का अनुमान जैसे पहले ही लगाया जा चुका था और उसके लिए कुछ आवश्यक निर्देश भी छोड़े गए थे।

इनमें से एक निर्देश उसे बेलिज्रेंट ब्लूज़ द्वारा दिए गए एक ऑनलाइन कार्य को पूरा करने और उनके संपर्क में आने की ओर ले जाता है।

यहीं से कथा का वास्तविक विस्तार शुरू होता है।


भविष्य की पृथ्वी, जो जीवित नहीं रह गई

बेलिज्रेंट ब्लूज़ से जुड़ने के बाद पात्रों के सामने पृथ्वी की एक ऐसी समयरेखा आती है, जो उनके वर्तमान से बहुत आगे की है।

वहाँ भविष्य की पृथ्वी वैसी नहीं है जैसी आज दिखाई देती है।

उसका वर्तमान जीवन समाप्त हो चुका है।

पृथ्वी पूरी तरह बदल चुकी है और वर्तमान युग में दिखाई देने वाले जीवन के अधिकांश रूप विलुप्त हो चुके हैं।

इस स्थिति को केवल भविष्य की एक संभावित आपदा मानकर छोड़ना संभव नहीं है, क्योंकि उन्हें यह भी पता चलता है कि इस भविष्य के पीछे अतीत में हुई एक विशिष्ट घटना या त्रुटि जिम्मेदार है।

और यदि उस मूल कारण को समाप्त कर दिया जाए, तो शायद भविष्य को बदला जा सकता है।


इक्कीस लोगों का असंभव अभियान

इस उद्देश्य से इक्कीस लोगों को एक ऐसे अभियान के लिए चुना जाता है, जिसकी दिशा पृथ्वी के इतिहास में लगभग चालीस हजार वर्ष पीछे जाती है।

उद्देश्य है—उस समस्या की जड़ तक पहुँचना, जिसने हजारों वर्षों बाद पृथ्वी के भविष्य को बदल दिया, और उसे समाप्त करना।

लेकिन इतने लंबे समय की यात्रा के लिए सीधे उस अभियान पर भेजना संभव नहीं है।

इसलिए उन्हें पहले दो अलग-अलग अभियानों से गुजरना पड़ता है।

पहला अभियान लगभग पाँच सौ वर्ष पुराने कैनरी द्वीपसमूह में ले जाता है, जहाँ उन्हें स्पेनी आक्रमण से ठीक पहले के समय में जीवित रहना है।

दूसरा अभियान लगभग नब्बे वर्ष पुराने ऑस्ट्रिया में पहुँचाता है—उस समय जब हिटलर का राजनीतिक उभार शुरू हो रहा था।

वहाँ उन्हें एक ऐसी गुत्थी सुलझानी होती है, जिसके संबंध भविष्य के कुछ रहस्यों से भी हैं और स्वयं ओरियन के अस्तित्व से भी।

ये दोनों अभियान केवल प्रशिक्षण नहीं हैं। वे आने वाली उस यात्रा के लिए पात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करते हैं, जिसमें उनके सामने इतिहास की सबसे कठिन परिस्थितियों में से एक आने वाली है।


चालीस हजार वर्ष पहले की पृथ्वी

जब अभियान अंततः अपने वास्तविक लक्ष्य तक पहुँचता है, तो उन्हें ऐसी पृथ्वी दिखाई देती है जिसकी कल्पना उन्होंने कभी नहीं की थी।

यह केवल आदिम मनुष्यों की दुनिया नहीं है।

भूमध्यसागर के आसपास हमंस नामक एक अलग प्रजाति विकसित हो रही है, जिसकी सभ्यता का स्तर बाद के मानव इतिहास की लगभग चौदहवीं-पंद्रहवीं शताब्दी जैसा दिखाई देता है।

दूसरी ओर, अटलांटिक के आसपास सैटंस नामक दूसरी प्रजाति मौजूद है, जो विकास की कहीं अधिक उन्नत अवस्था तक पहुँच चुकी है और जिसकी सभ्यता लगभग उन्नीसवीं शताब्दी के स्तर जैसी प्रतीत होती है।

अर्थात चालीस हजार वर्ष पहले की पृथ्वी पर एक ही प्रकार की सभ्यता नहीं थी।

वहाँ अलग-अलग प्रजातियाँ थीं, अलग-अलग सामाजिक व्यवस्थाएँ थीं और उनके अपने राजनीतिक तथा सैन्य संघर्ष थे।

भविष्य से आए लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें अपने वास्तविक उद्देश्य को छिपाते हुए इन्हीं समाजों के बीच रहना पड़ता है।


जिन्हें मिथक समझा गया था, वे वास्तव में जीव थे

कथा का एक महत्वपूर्ण आकर्षण उन प्राणियों के सामने आने से पैदा होता है, जिन्हें आधुनिक मनुष्य दुनिया की अलग-अलग पौराणिक परंपराओं में जानता है।

जिन्हें बाद की सभ्यताओं ने कल्पना, लोककथा या मिथक मान लिया, वे यहाँ वास्तविक जीवों के रूप में दिखाई देते हैं।

इससे कहानी एक दिलचस्प संभावना प्रस्तुत करती है—

क्या प्राचीन मिथकों में वर्णित कुछ अद्भुत जीव वास्तव में कभी पृथ्वी पर मौजूद थे?

क्या उनके विलुप्त हो जाने के बाद उनकी स्मृतियाँ कथाओं और किंवदंतियों के रूप में बची रह गईं?

भविष्य से आए पात्रों के लिए यह खोज उनके अपने ज्ञान और विज्ञान की सीमाओं को चुनौती देने लगती है।


जिस समस्या की तलाश थी, उसकी जड़ और पीछे निकलती है

अभियान का उद्देश्य चालीस हजार वर्ष पहले उस घटना की तलाश करना था जिसने भविष्य को बदल दिया।

लेकिन वहाँ पहुँचकर पता चलता है कि कहानी की जड़ अभी और पीछे जाती है।

हजारों वर्ष पहले इसी समस्या से जुड़ा एक विशाल युद्ध हो चुका था।

उस युद्ध ने उस समय पृथ्वी पर रहने वाली आबादी के एक बड़े हिस्से को समाप्त कर दिया था।

भविष्य से आए लोग जब उस प्राचीन संघर्ष में उलझते हैं, तब उन्हें केवल अपने मिशन को पूरा करने की चुनौती नहीं रहती। उन्हें उन सभ्यताओं के बीच जीवित भी रहना पड़ता है जिनकी राजनीति, युद्ध और सामाजिक संरचना उनके लिए पूरी तरह अपरिचित है।

इस दौरान सामने आने वाले रहस्य उनके अपने समय के ज्ञान-विज्ञान की सीमाओं को बार-बार चुनौती देते हैं।


जब भविष्य अतीत का पीछा करने लगे

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब उन्हें पता चलता है कि जिस भविष्य को बदलने के लिए वे अतीत में आए हैं, उस भविष्य से जुड़े जीव भी उसी अतीत तक पहुँच चुके हैं।

अब संघर्ष केवल वर्तमान और अतीत के बीच नहीं रह जाता।

भविष्य की शक्तियाँ भी उसमें शामिल हो जाती हैं।

इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर एक और महायुद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, जिसमें भारी जनहानि होती है और अभियान का उद्देश्य जीवित रहना जितना कठिन हो जाता है, उतना ही कठिन भविष्य को बदलना भी।

इस बिंदु पर ओरियन समय-यात्रा की कथा से आगे बढ़कर विभिन्न कालखंडों की शक्तियों के बीच संघर्ष की कहानी बन जाता है।


एक ऐसी सभ्यता जिसे इतिहास कभी दर्ज नहीं कर सका

ओरियन की कल्पित दुनिया का सबसे बड़ा आधार यही है कि चालीस हजार वर्ष पहले पृथ्वी वैसी नहीं थी जैसी आधुनिक इतिहास हमें बताता है।

वहाँ मानव जैसी प्रजातियाँ संगठित होकर राज्य बनाने की स्थिति में पहुँच चुकी थीं।

सैटंस जैसी दूसरी प्रजाति शहर और देश बनाने तक की विकास-यात्रा पूरी कर चुकी थी।

और सबसे रोचक बात यह है कि बाद के हजारों वर्षों में विलुप्त हो चुकी यह प्रजाति भविष्य के मनुष्यों के लिए एक अलग पहचान—एलियंस—के रूप में सामने आती है।

इसी प्राचीन पृथ्वी पर अनुनाकी, नेफिलिम और साइक्लॉप्स जैसे नाम भी मौजूद हैं।

और इस संसार में ड्रैगन भी केवल कल्पना नहीं हैं।


मिथक, इतिहास और विज्ञान के बीच की सीमा

ओरियन की कथा का विस्तार इस प्रश्न के इर्द-गिर्द होता है कि मनुष्य अपने अतीत के बारे में वास्तव में कितना जानता है।

यदि कोई सभ्यता हजारों वर्ष पहले पूरी तरह समाप्त हो जाए, तो उसके प्रमाण कितने समय तक बच सकते हैं?

यदि किसी प्रजाति का एक भी विश्वसनीय अभिलेख भविष्य तक न पहुँचे, तो बाद की सभ्यता उसे किस रूप में याद करेगी?

और यदि वास्तविक घटनाएँ पीढ़ियों तक मौखिक कथाओं में बदलती रहें, तो क्या कुछ ऐतिहासिक सत्य अंततः मिथकों के रूप में हमारे सामने नहीं आ सकते?

कथा इन प्रश्नों को समय-यात्रा, विलुप्त सभ्यताओं और विभिन्न प्रजातियों के संघर्ष के माध्यम से सामने रखती है।


पंद्रह भागों में फैली एक असाधारण समय-यात्रा

ओरियन पंद्रह भागों में विकसित होने वाली एक लंबी गाथा है। इसकी शुरुआत आधुनिक एथेंस की एक असंभव घटना से होती है, लेकिन धीरे-धीरे कथा वर्तमान से भविष्य और फिर भविष्य से चालीस हजार वर्ष पुराने अतीत की ओर चली जाती है।

पहले चरण में परिवार, पहचान और भविष्य की पृथ्वी से जुड़े रहस्य सामने आते हैं।

इसके बाद प्रशिक्षण अभियानों के माध्यम से पात्र अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों में प्रवेश करते हैं।

अंततः चालीस हजार वर्ष पहले की पृथ्वी उनका वास्तविक कार्यक्षेत्र बनती है—एक ऐसी पृथ्वी जहाँ मनुष्य के साथ दूसरी प्रजातियाँ भी सभ्यताओं का निर्माण कर रही हैं और जिन जीवों को बाद के मनुष्य मिथकों में खोजते हैं, वे वहाँ वास्तविक रूप में मौजूद हैं।

कथा का विस्तार इसी क्रम में होता है—एक जीवित पंजे से शुरू होकर एक विलुप्त संसार तक।

और अंततः ओरियन अपने पाठक के सामने एक ऐसा प्रश्न छोड़ता है जिसे इतिहास, विज्ञान और कल्पना तीनों अपने-अपने तरीके से देखते हैं:

क्या पृथ्वी का अतीत वास्तव में उतना ही परिचित है, जितना हम उसे समझते हैं?

क्योंकि यदि चालीस हजार वर्ष पहले ऐसी सभ्यताएँ, प्रजातियाँ और संघर्ष मौजूद थे, तो आधुनिक इतिहास उनके बारे में इतना कम क्यों जानता है?

शायद इसी अनजान अतीत की तलाश ओरियन की सबसे बड़ी रोमांचक यात्रा है।


खरीद के लिए सीरीज़ लिंक:




No comments