Ashfaq Ahmad
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फिल्म समीक्षा: पार्थेनोप

 


सुंदर इंसान अक्सर एक अनचाही उदासी में मुब्तिला रहते हैं ।


हर इंसान अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जीने की कोशिश करता हैं । पार्थेनोप का किरदार भी कुछ इसी तरह का हैं ।


पार्थेनोप एक बहुत ही खबसूरत लड़की है जो नेचर से और लोगो से कुछ न कुछ सीखना चाहती है, जिसमे उनकी उम्र मायने नही रखती हैं, लेकिन जो सीखना है वो सिर्फ अपनी शर्तों पर । 


पार्थेनोप मे देवी जैसा आकर्षण है जो सभी को अपनी और आकर्षित करती हैं । यह एक बहुत खूबसूरत और रहस्यमयी लड़की हैं, जो हर तरह के जवाब के लिए हमेशा तैयार रहती हैं ।


पार्थेनोप भी अनेको लोगो से आकर्षित होती है उनसे मिलती है लेकिन उसका आकर्षण कुछ अलग तरह का है वो उन सभी लोगो मे वो ढूंढती है, जिसकी उसको तलाश हैं । जिंदगी के अनेको पहलू में से कुछ पहलू ।


समुन्द्र में बहती हुई लहरों की तरह बहते अपने जीवन मे खुद को तलाशती पार्थेनोप कई दृश्यों में वाकई दिवा लगती हैं । उसका ड्रेस सेंस और चलने की अदा बहुत प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही मूवी में चलता हुआ म्यूजिक मूवी के दृश्य की खूबसूरती को बढ़ा देता हैं ।


"सुंदरता एक युद्ध की तरह है, यह द्वार खोलती हैं ।"


पहले दृश्य में पार्थेनोप को बिकनी में क्रिस्टल जैसे साफ नीले समुन्द्र में बिकनी में दिखाते हैं, बिल्कुल पौरोणिक कथाओं की एक जलपरी की तरह। इससे खूबसूरत शायद ही कोई और हो । 


पार्थेनोप अपने करीब किसी को नही आने देती । वो चुनाव करती है अपने मन से । उसका मनपसंद विषय एंथ्रोपोलॉजी है जिसमे वो मानव के मन, उसके रहन सहन, समाज और सभ्यता के बारे में जानना चाहती है । इस विषय मे वो ब्रिलियेंन्ट भी होती है कॉलेज का एक प्रोफेसर उससे बहुत प्रभावित होता है और उसे भविष्य के प्रोफेसर के रूप में देखता हैं ।


पार्थेनोप का पढ़ाई का मकसद सिर्फ इंसानी व्यवहार को जानना और समझना हैं । इंसानी जीवन में सुख के साथ अनचाहे दुःख क्यों आ जाते हैं ?


"इमोशनल इंसान बहुत नाजुक होते हैं ।"


"सिर्फ खूबसूरती से किसी का प्यार नही पाया जा सकता । भले ही अपनी खूबसूरती से वो किसी भी मर्द को अपनी और आकर्षित कर ले ।"


इस मूवी की सुंदरता देखने वाले के नज़रिए पर भी निर्भर करती हैं क्योकि इस मूवी में काफी बोल्ड सीन है जिनमे एक सीन इंसानो की भीड़ में, अपना वंश बढ़ाने के लिए , एक जोड़े के द्वारा किये जाने वाले सम्भोग का भी हैं । इसलिए इस मूवी को किसी के साथ देखने का चुनाव अपनी समझ से करें ।


जीवन के सभी रसो को समझने के लिए बोल्ड होना बहुत जरूरी है, इसके बगैर जीवन के सभी रसो को सिर्फ पढ़ा या जाना जा सकता है, लेकिन उन्हें महसूस नही किया जा सकता ।


"क्या आपको इस बात का अहसास है कि आपकी सुंदरता से कितनी परेशानी होती हैं ।"


मूवी में पार्थेनोप एक लेखक, एक बचपन का दोस्त, एक अभिनेत्री, एक अरबपति बिजनेसमैन, एक माफिया, एक पादरी और एक प्रोफेसर से मिलती हैं । यह सभी लोग अपने अपने स्तर पर उससे जुड़ते है और जीवन का एक नया सबक दे जाते हैं । हर नए शख्स से मिलने पर पार्थेनोप उनमे कुछ न कुछ खोजना शुरू कर देती हैं ।


अपने भाई के मरने पर पार्थेनोप का भावनात्मक संघर्ष कई दृश्यों में नज़र आता हैं ।


पार्थेनोप इतनी खूबसूरत है कि अपने शारीरिक आकर्षण से जीवन की सभी सुख सुविधाओं को पा सकती हैं, लेकिन वो अपना सफर अपने तक सीमित रखना चाहती हैं, एक रहस्यमय औरत की तरह । जैसे जीवन एक माया के समान हो और उस माया में उसे वो चुनना है जो उसे चाहिए ।


एक जगह पार्थेनोप एक्टर बनने का चुनाव करती है लेकिन इस फील्ड के डार्क चेहरे को देखकर वो इससे बाहर निकल जाती हैं ।


बाहरी खूबसूरती के पीछे कई राज छिपे होते है, जो लोग परफेक्ट लगते है, असल मे वो परफेक्ट होते नही ।


कई बार बदसूरती की खूबसूरती और खूबसूरती की बदसूरती नज़र नही आती ।


पार्थेनोप खुशी की तलाश में अपने आपको दूसरों को सौप देती हैं । पादरी वाले दृश्य में आप यह समझ जायंगे ।


प्रोफेसर के बेटे की हालत देखकर पार्थेनोप को जीवन के दोनों पहलू साफ साफ नजर आ जाते हैं ।  जिसे वो खोज रही थी, उसे वो मिल जाता हैं ।


यह मूवी खुशी और खूबसूरती की खोज में भटकती एक लड़की की हैं। जो हर जगह और हर इंसान में इसे खोजने के लिए पूरी मूवी में नए नए लोगो से मिलती है, उनसे जुड़ती और अलग हो जाती हैं ।


मूवी के कई दृश्य रुके रुके से लगते है, जैसे मूवी चलती हुई रुक गई हो, शायद फिल्मकार यहाँ पार्थेनोप के जीवन की गति को दिखाना चाह रहा है जिस तरह से उसका जीवन धीमी गति से चल रहा हैं। 


गहरा अनुभव अक्सर समय को रोक देता हैं ।


मूवी के अंत मे उम्र के अंतिम पड़ाव पर समुन्द्र के पास खड़ी पार्थेनोप के चेहरे को देखकर ऐसा लगता है, जिंदगी में काफी कुछ करने के बाद भी बहुत कुछ बाकी रह गया । शायद इसे ही जीवन कहते हैं । 


मूवी की सिनेमेटोग्राफी बहुत शानदार हैं । उसे देखकर वहाँ जाने का मन करेगा । मूवी के कई सीन एक पेंटिंग की तरह लगते हैं । मूवी के अनेक दृश्य दिल मे रुक से जाते हैं, निहारने का मन करता हैं ।


मूवी में काफी दृश्य अनावश्यक लगेंगे, लेकिन यदि आप मूवी के मर्म से जुड़ गए तो उन दृश्यों से भी जुड़ जायंगे । 


यह मूवी ठहराव पसंद लोगो के लिए हैं, जो जीवन को धीमी गति से जीते है, जीवन को समझकर उसका रस लेते हुए । नई जनरेशन को यह मूवी बहुत धीमी लगेगी ।


मूवी देखने का चयन अपने मिज़ाज़ और सहजता के अनुसार करें ।


शुक्रिया।  ❤️


Parthenope (2024)

Hindi English Italian

Fantasy/Drama 

2h 16m

6.5/10

Prime Video


#Parthenope 

#moviereview




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