फिल्म समीक्षा: फ्राइडे नाईट प्लान
यह मूवी टीन ऐज लाइफ पर आधारित हैं।
वैसे तो ये मूवी फ्राइडे नाईट प्लान पार्टी पर हैं। लेकिन फिल्मकार इस बहाने दो भाइयों के दर्द को हल्के फुल्के अंदाज़ में पेश कर जाता हैं और साथ ही दोनो को एक दूसरे को समझने की समझदारी दे जाता हैं ।
सिद्धार्थ-सिड और आदित्य-आदि दोनो टीनऐज में है और अपनी माँ के साथ रहते हैं । फादर दुनिया से जा चुके हैं।
माँ बिजनेस वीमेन हैं।
सिड 18 का हो चुका हैं और आदि अभी 16 का हैं ।
सिड अंतर्मुखी हैं और आदि बहिर्मुखी । दोनो भाई घर मे हमेशा एक दूसरे से झगड़ते रहते हैं । अक्सर बडे अपने इशूज का गुस्सा हमेशा छोटो पर निकालते हैं ।
स्कूल में एक फुटबाल मैच में गोल करके सिड स्कूल में हीरो बन जाता हैं । लेकिन सिड अंतर्मुखी होने की वजह से उसे ज्यादा एन्जॉय नही कर पाता हैं । उसका फ्राइडे नाईट प्लान पार्टी में जाने का मन भी नही होता हैं । लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनती है कि सिड को उस पार्टी में, आदि को अपने साथ लेकर जाना पड़ता हैं । माँ किसी बिजनेस मीटिंग में शहर से बाहर हैं । दोनो माँ को बिना बताएं पार्टी में शामिल होते हैं।
पार्टी में टीनएजर्स की मौजमस्ती दिखाई गई हैं, जिसे टीनएजर्स अच्छे से एन्जॉय करते हैं । लेकिन इसी पार्टी के चक्कर मे एक गड़बड़ी हो जाती हैं, उसे सॉल्व करने में दोनो भाई एक दूसरे के करीब आ जाते हैं और एक दूसरे को समझने लगते हैं । यह सब कैसे होता हैं इसे आप मूवी में देखिए।
सिड और आदि का अभिनय देखने लायक हैं । दोनो की बॉन्डिंग भी जबरदस्त हैं । जहाँ सिड अपने बड़े होने का एहसास हमेशा अपने ऊपर डाले रहता हैं वही आदि छोटे होने की चंचलता अपने ऊपर ओढ़े रहता हैं। लेकिन इन सबसे परे जिसके तहत वो ऐसा करते है या यूं कहें कि मैच्योर बनते हैं, वो उनके पिता के दुनिया से जाने का दुःख और उनके जाने के बाद का ख़ालीपन हैं।
सिड अपने डिसीजन लेने से डरता हैं। आदि उसे याद दिलाता है कि दुनिया का सबसे कूल इंसान सिड ही था, लेकिन डैडी के जाने के बाद.....
सिड को भी आदि के दोस्त से पता चलता है कि आदि दर्द में हैं, लेकिन जाहिर नही होने देता । वो जितना चंचल हैं, उतना ही अंदर से टूटा हुआ । सिड को सुपर हीरो समझता हैं, पूरी पार्टी में उसकी इमेज सुपर हीरो, जेम्स बांड की तरह बना देता हैं । बड़ा भाई है आखिर।
एक दूसरे से लड़ने वाले भाई अब एक दूसरे को समझते हैं । अपनी अपनी भावनाएं एक दूसरे के साथ शेयर करते है और एक दूसरे से अपनी गलतियों के लिए माफी मांगते हैं।
दोनो भाइयों का गले मिलना सुखद अनुभव देता हैं।
मूवी एक सीन जब सबइन्स्पेक्टर सिड को पुलिस की रेस्पेक्ट करने को बोलता है और सिड.....🤣....स्लो मोशन का ये सीन देखने लायक हैं।
शेयरिंग ऐसी चीज हैं जो इंसान के लिए एक खुराक की तरह हैं । यह ना मिले तो इंसान मुरझा सा जाता हैं। जैसे एक पौधे को उसकी खुराक नही मिले तो वो पनप नही पाता, पनप भी जाता है तो पूर्ण नही हो पाता । ठीक ऐसा ही इन्सान के साथ होता हैं।
वर्तमान में एकल परिवार ज्यादा होने की वजह से शेयरिंग होना बहुत कम हो गया हैं। सँयुक्त परिवार में अभी भी शेयरिंग होना जारी है जिससे वहां अवसाद पनपने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं।
एकल परिवार में भी आजकल एक बच्चे का चलन ज्यादा हैं, जिससे वो सिंगल बच्चे अपनी भावनाएं घर मे अपने हम उम्र के न होने की वजह से किसी के साथ शेयर नही कर पाते हैं। उनका बचपन खत्म सा हो जाता हैं और बड़ा होने पर बचपन की यह कमी उनमे अवसाद के रूप में पनप सकती हैं।
शेयरिंग कीजिए, ट्रॉमा निकलते रहेंगे और आप स्वस्थ रहेंगे । 🤗
शुक्रिया 🦋
Friday Night Plan
(2023)
Hindi Audio
Available on Netflix
- Review Written by



Post a Comment