Ashfaq Ahmad
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फिल्म समीक्षा: ट्रैप्ड

 


कल्पना कीजिए आप किसी ऐसी ऊंची बिल्डिंग में फंस जाएं, जहाँ बिल्डिंग में आपके अलावा कोई और न हो, जहाँ आपका मोबाइल बन्द हो जाएं, किसी को पता न हो कि आप उस फ्लेट में हैं, बिजली चली जाएं, वहाँ खानेपीने को कुछ ना हो और बाहर निकलने का कोई रास्ता नज़र नही आ रहा हो तो आप क्या करेंगे ?

कॉल सेंटर में काम करने वाला शौर्य अपनी प्रेमिका से शादी करने का प्लान बनाता हैं । इसके लिए वो एक नए फ्लेट की तलाश करता हैं, जो उसे सस्ते में मिल जाएं ।

सस्ते के चक्कर मे शौर्य एक 35 मंजिला इमारत में शिफ्ट हो जाता है, जो कि कुछ कानूनी पचड़ों की वजह से फिलहाल बन्द है । उसमे कोई भी नही रहता, सिवाय एक वॉचमैन के ।

शौर्य बिना किसी को बताएं उस नए फ्लैट में शिफ्ट हो जाता हैं । फ्लेट के दरवाजे में लॉक प्रॉब्लम होने की वजह से वो फ्लेट में बंद हो जाता हैं ।

अक्सर सर्वाइवल मूवीज में हमने नायक/नायिका को चट्टानों में फंसा हुआ या जंगल मे कही या जोम्बियों के बीच या किसी टापू पर या समुन्द्र में कही या पहाड़ियों में या ऊँचाई पर या किसी सुनसान जगह पर फंसा देखा है । लेकिन इस मूवी में नायक शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाके की एक बहुमंजिला इमारत के एक फ्लैट में फंस जाता है ।

वहाँ से निकलने के लिए शौर्य खिड़की से चिल्लाता हैं, टोर्च और हाथों से, बर्तन बजाकर इशारा करता है, दरवाजे को तोड़ने की कोशिश करता हैं, टीवी स्क्रीन को खिड़की से बाहर फेंक देता हैं की कोई नोटिस कर ले, गत्ते पर हेल्प लिखकर बाहर फेंकता हैं,  गुलेल की सहायता से भी कोशिश करता है लेकिन उसकी सारी कोशिशें बेकार जाती हैं ।

काफी कोशिश करने के बाद भी शौर्य वहाँ से निकल नही पाता। 
लेकिन अगर जीना है तो कोशिश तो करनी पड़ेगी ही । 

एक गत्ते पर अपने खून से मदद शब्द लिखकर बगल वाले मकान की छत पर डाल देता हैं । पड़ोसी महिला इसकी जानकारी वॉचमैन को देती हैं । वॉचमैन कहता है कि पूरी बिल्डिंग खाली है, उसमे कोई नही । वो खुद जाकर बिल्डिंग में देखती भी है लेकिन उसे कोई नज़र नही आता । अब 35 मंजिल तक कोन चेक करेगा ।

एक कोशिश खिड़की में कपड़ो और गद्दे पर पर आग लगाकर भी करता है, लेकिन कोई उसे नोटिस नही करता ।
शुरू में शौर्य को यह मामूली लगता है लेकिन बाद में उसे महसूस हो जाता है कि वो ट्रेप होकर सर्वाइवल जोन में चला गया हैं। 

फ्लेट में खाने पीने को कुछ नही । पानी के लिए गीजर में से पानी पीने की कोशिश, स्वमूत्र सेवन और पानी की बोतल को निचोड़कर पीने में शौर्य की प्यास और बेबसी को देखिए । 

मामूली सा दिखने वाला पानी भी ना मिले तो क्या हालत हो जाती है इंसान की । 

बारिश आने से पानी की समस्या का हल हो जाता है कुछ दिनों के लिए । बारिश वाले दृश्य में शौर्य की खुशी देखिए..जीने की खुशी । 

शौर्य शाकाहारी हैं । अतीत के एक दृश्य में शौर्य कहता है कि भला कोई किसी को मारकर कैसे खा सकता हैं ।

जब परिस्थिति खुद को जीवित रखने की हो तब किसी को भी मारकर खाया जा सकता हैं । प्रतिकूल परिस्थितियां किसी से भी कुछ भी करवा सकती हैं । उस वक्त हमे सिर्फ खुद को बचाना होता हैं ।

जिंदा रहना है तो कुछ तो खाना पड़ेगा ही भले वो किसी भी फ़ूड चैन में आता हो, यहाँ जरूरी खुद को जिंदा रखना है, न कि दुसरो को । कबूतर हो या कॉकरोच हो या कीड़े मकोड़े । शौर्य के बाद केवल यही विकल्प होते हैं । 

एक सप्ताह तक शौर्य किसी तरह अपना गुजारा कर लेता है । अब पानी और कबूतर भी खत्म हो जाते हैं । कुछ न खानेपीने की वजह से कमजोरी से उसकी हालत बिगड़ने लगती हैं । अब शौर्य अपनी आखरी कोशिश करता है, उसे आप मूवी में देखिए । 

खानपान में फालतू की बहस करने वाले भी जब सर्वाइवल मोड में आते है तो वो सब करने को तैयार हो जाते है जो उनके स्वभाव में नही, लेकिन खुद को जीवित रखना अव्वल हैं । अगर हम ही नही होंगे तो हमारा स्वभाव कहाँ बचेगा। 

फ्लेक्सिबल इंसान बहुत ज्यादा तरक्की करते है, बजाय अड़ियल इंसानो के । इंसानो की बनी सभी धारणाएं अनुकूलता पर चलती हैं । प्रतिकूलता में सभी धारणाएं टूट जाती हैं, भले ही वो किसी भी संदर्भ मे हो ।

अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए शौर्य एक चूहे को बंधक बनाकर उसे अपना साथी बना लेता हैं । उसी से बातें करके अपना टाइम पास करता है और खुद को मोटिवेट करता रहता हैं ।
इस मूवी में इंसानी इच्छाशक्ति को नायक ने बेहतरीन तरीके से दिखाया हैं ।  मूवी में नायक का अभिनय अदभुत हैं।  उन्होंने जिस तरह से अपने डर, घबराहट, हताशा और खुद के कमजोर पड़ने को पर्दे पर दिखाया है वो प्रशंसनीय हैं, दिल जीत लेता हैं । बेबसी, घुटन और लाचारी में शौर्य की बॉडी लैंग्वेज शानदार हैं ।

परिस्तिथियां कितनी भी कठिन क्यों न हो लेकिन अगर मानव अस्तित्व उस परिस्थिति से निकलने की ठान ले तो उसे कोई नही रोक सकता । मानव होने का मतलब यही हैं ।

राजकुमार राव ने इस किरदार के लिए बीस दिनों तक केवल गाजर और कॉफी को आहार के रूप में लिया था और शाकाहारी होने के बावजूद पहली बार माँस का सेवन किया था ।

यह एक शानदार सर्वाइवल मस्ट वाच मूवी है जो आपको लास्ट तक आपको खुद से जोड़े रखेगी ।  

शुक्रिया । 💫

Trapped (2016)
Hindi
Thriller/Action 
1h 45m
7.5/10
Youtube

#moviereview


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