सांडे का तेल और मर्दाना ताकत का सच: एक मासूम सरीसृप की दर्दनाक कहानी
सांडा: मर्दाना कमजोरी के नाम पर जान गंवाने वाला मासूम जानवर
राजस्थान के थार से लेकर पाकिस्तान के शुष्क इलाकों तक रेत और घास के बीच अपनी बिलों में रहने वाला एक अनोखा सरीसृप आज इंसानी अंधविश्वास और अवैध व्यापार की कीमत चुका रहा है।स्थानीय भाषा में इसे सांडा या सांडा छिपकली कहा जाता है। इसका प्रचलित वैज्ञानिक नाम सारा हार्डविकी है और इसे भारतीय कांटेदार पूंछ वाली छिपकली भी कहा जाता है।
दिखने में यह छिपकली जैसा जरूर है, लेकिन इसकी सबसे खास पहचान इसकी मोटी, कांटेदार पूंछ है। यही पूंछ इस जानवर के लिए जीवन बचाने वाली संरचना भी है और दुर्भाग्य से इंसानों के लिए इसके शिकार का एक बड़ा कारण भी।
रेगिस्तान में रहने वाला शाकाहारी सरीसृप
सांडा मुख्य रूप से शुष्क रेगिस्तानी और घास वाले इलाकों में पाया जाता है। यह जमीन के भीतर लंबी और गहरी बिलें बनाकर रहता है। दिन के समय बाहर निकलकर धूप सेंकता और भोजन की तलाश करता है तथा खतरा महसूस होने पर अपनी बिल में वापस चला जाता है।
वयस्क सांडे मुख्यतः वनस्पतियों पर निर्भर रहते हैं। हालांकि इसे पूरी तरह “कीट कभी नहीं खाने वाला” कहना सही नहीं है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में विशेष परिस्थितियों, खासकर कम उम्र या कुछ मौसमों में, कीटों के सेवन के प्रमाण भी मिले हैं। इसलिए इसे मुख्यतः शाकाहारी कहना अधिक सटीक है।
यह रेगिस्तान के कठिन वातावरण के लिए असाधारण रूप से अनुकूलित है। इसकी पूंछ में वसा जमा रहती है, जो कठिन मौसम और भोजन की कमी के दौरान ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम करती है।
यही प्राकृतिक वसा बाद में इसके लिए अभिशाप बन जाती है।
सांडे का तेल आखिर बनता किससे है?
लोक चिकित्सा और पारंपरिक मान्यताओं में लंबे समय से सांडे की वसा से निकाले गए तेल को कई तरह के दर्द, जोड़ों की समस्या और विशेष रूप से पुरुष यौन कमजोरी के इलाज के लिए बेचा जाता रहा है।
कई जगह इसे “सांडे का शुद्ध तेल” कहकर बेचा जाता है और ग्राहकों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि यह पुरुष शक्ति बढ़ाने या यौन क्षमता सुधारने वाली प्राकृतिक औषधि है।
यहीं से इस जानवर के अवैध शिकार का सबसे बड़ा बाजार पैदा होता है।
सांडे की पूंछ और शरीर में जमा वसा को निकालकर गर्म किया जाता है और उससे तेल जैसा पदार्थ प्राप्त किया जाता है। लेकिन यह मान लेना कि इस वसा में कोई विशेष चमत्कारी औषधीय गुण मौजूद हैं, वैज्ञानिक प्रमाणों से समर्थित नहीं है।
किसी पदार्थ में वसा अम्ल पाए जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह पदार्थ नपुंसकता या स्तंभन दोष का उपचार कर सकता है।
क्या सांडे का तेल मर्दाना कमजोरी दूर करता है?
इस दावे का कोई विश्वसनीय चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है।
सांडे के तेल को पुरुष यौन शक्ति, लिंग की वृद्धि या स्तंभन संबंधी समस्या के उपचार के लिए इस्तेमाल करने की परंपरा जरूर मौजूद है, लेकिन पारंपरिक इस्तेमाल और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार दो अलग बातें हैं।
स्तंभन दोष के पीछे अनेक कारण हो सकते हैं—रक्त प्रवाह की समस्या, मधुमेह, हृदय और रक्तवाहिका संबंधी रोग, हार्मोनल असंतुलन, कुछ दवाएं, तनाव और अन्य शारीरिक या मानसिक कारण।
इन समस्याओं का इलाज कारण के अनुसार किया जाता है।
किसी तेल की मालिश से लिंग का आकार स्थायी रूप से बढ़ जाना या उसमें “नई मांसपेशी” अथवा अतिरिक्त मांस बन जाना कोई सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं है। इस तरह का दावा भ्रामक है।
इसी तरह “बहुत गर्म तेल होने के कारण रक्त संचार बढ़ता है” जैसी धारणा को भी यौन कमजोरी के उपचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
बल्कि अज्ञात और मिलावटी तेल को संवेदनशील अंगों पर लगाने से त्वचा में जलन, एलर्जी, संक्रमण या अन्य नुकसान हो सकता है।
फिर लोग इसे क्यों खरीदते हैं?
इसका जवाब विज्ञान से अधिक मनोविज्ञान और लोकविश्वास में छिपा है।
पुरुष यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर लोग अक्सर खुलकर डॉक्टर से बात करने में झिझकते हैं। ऐसे में “प्राकृतिक”, “देसी”, “जड़ी-बूटी वाला” या “गुप्त इलाज” जैसे दावे उन्हें आकर्षित कर सकते हैं।
सांडे के तेल के विक्रेता इसी विश्वास का फायदा उठाते हैं।
कुछ स्थानों पर ग्राहक को यह विश्वास दिलाने के लिए सांडा सामने रखकर उसकी वसा निकालने की प्रक्रिया भी दिखाई जाती है। इससे ग्राहक को लगता है कि उसे असली और शुद्ध तेल मिल रहा है।
लेकिन किसी जानवर को सामने मारकर उसके शरीर से पदार्थ निकाल देना उस पदार्थ को औषधि प्रमाणित नहीं करता।
सांडे का शिकार इतना आसान क्यों है?
सांडा अपना अधिकांश समय बिल में बिताता है। यही बिल शिकारियों के लिए उसके ठिकाने की पहचान बन जाते हैं।
अवैध शिकारी कई बार बिल खोदकर या अन्य तरीकों से उन्हें बाहर निकालते हैं। संरक्षण से जुड़ी रिपोर्टों में इस प्रजाति के शिकार और उसकी वसा से तेल निकालने के लिए होने वाले अवैध व्यापार का उल्लेख मिलता है।
सबसे क्रूर बात यह है कि केवल कुछ ग्राम वसा या तेल के लिए एक जीव की जान ले ली जाती है।
मूल्यवान वसा उसकी पूंछ में जमा होना उसके लिए रेगिस्तान में जीवित रहने की प्राकृतिक व्यवस्था है, लेकिन मनुष्य ने उसी जैविक विशेषता को उसके शोषण का कारण बना दिया।
क्या सांडा सचमुच विलुप्त होने की कगार पर है?
इसे सीधे “विलुप्त” कहना गलत होगा, लेकिन इसकी स्थिति चिंताजनक है।
भारत में सारा हार्डविकी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-१ में रखा गया है। इसका अर्थ है कि इसे उच्च स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है और इसका शिकार तथा अवैध व्यापार गंभीर अपराध है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की २०२५ की प्रजाति सूची में इसे अनुसूची-१, अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार के नियमन वाली व्यवस्था में परिशिष्ट-२ और आईयूसीएन की वैश्विक लाल सूची में असुरक्षित श्रेणी में दर्ज किया गया है।
इसलिए इसे केवल “रेगिस्तान की आम छिपकली” समझना बड़ी भूल होगी।
सांडा रेगिस्तान के लिए भी महत्वपूर्ण है
किसी जानवर को बचाने का कारण केवल यह नहीं होना चाहिए कि वह इंसानों के लिए उपयोगी है।
सांडा अपने प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। इसकी बिलें मिट्टी और सूक्ष्म आवास की संरचना को प्रभावित करती हैं और स्वयं यह कई शिकारी पक्षियों तथा अन्य मांसाहारी जीवों के भोजन का हिस्सा है।
रेगिस्तान में रहने वाला कोई भी जीव वहां की खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक संतुलन का हिस्सा होता है। इसलिए किसी प्रजाति का लगातार अवैध शिकार केवल उस प्रजाति को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर असर डाल सकता है।
“मर्दाना ताकत” के नाम पर एक जानवर की हत्या
सांडे की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि उसके मारे जाने का प्रमुख कारण उसकी कोई आक्रामकता या इंसानों के लिए खतरा नहीं, बल्कि एक ऐसी मान्यता है जिसका चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है।
जिस वसा का इस्तेमाल यह जीव कठिन रेगिस्तानी परिस्थितियों में ऊर्जा बचाकर जीवित रहने के लिए करता है, उसी वसा को मनुष्य ने “मर्दाना ताकत” का नुस्खा बना दिया।
सच यह है कि सांडे का तेल यौन कमजोरी का प्रमाणित उपचार नहीं है। इसके लिए किसी संरक्षित वन्यजीव को मारना न तो चिकित्सा है और न ही मर्दानगी।
अगर किसी व्यक्ति को यौन कमजोरी, स्तंभन दोष या कामेच्छा में कमी जैसी समस्या है तो उसका वास्तविक कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच कराना कहीं अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक रास्ता है।
एक मासूम जानवर की जान लेकर निकाला गया तेल किसी इंसान को अधिक “मर्द” नहीं बनाता।
—मूल आलेख एवं विषय-विचार: धर्मेंद्र कुमार
पुनर्लेखन, तथ्य-जाँच एवं संपादकीय प्रस्तुति: आखरवाणी संपादकीय







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