Ashfaq Ahmad
हर महीने पाइये अशफ़ाक़ अहमद की मुफ्त थ्रिलर ई-बुक्स!
अभी फॉलो करें: Amazon • Goodreads • Bookbub • Substack•

क्या पाकिस्तान १४ अगस्त को आज़ाद हुआ था? १५ अगस्त १९४७ से जुड़ा असली इतिहास

 


पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस १४ अगस्त ही क्यों है? इतिहास क्या कहता है?


पाकिस्तान हर वर्ष १४ अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। दूसरी ओर, भारत १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। इसी अंतर को लेकर अक्सर यह सवाल उठाया जाता है कि जब १९४७ में ब्रिटिश सत्ता का अंत १५ अगस्त को हुआ था, तो पाकिस्तान की स्वतंत्रता की तारीख १४ अगस्त कैसे हो गई?


इस सवाल का जवाब थोड़ा जटिल है और इसे समझने के लिए १९४७ की घटनाओं को उनके वास्तविक क्रम में देखना होगा।


सबसे पहले एक बात स्पष्ट कर देना जरूरी है। पाकिस्तान भारत से स्वतंत्र होकर अलग देश नहीं बना था। १९४७ में ब्रिटिश भारत का विभाजन हुआ और उसके परिणामस्वरूप भारत तथा पाकिस्तान दो नए अधिराज्य के रूप में अस्तित्व में आए। दोनों पर ब्रिटिश सत्ता का औपचारिक अंत एक ही संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था।


१५ अगस्त १९४७ थी मूल स्वतंत्रता की तारीख


ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम में सत्ता हस्तांतरण की प्रभावी तारीख १५ अगस्त १९४७ निर्धारित की गई थी। इसी दिन ब्रिटिश भारत से दो नए अधिराज्यों—भारत और पाकिस्तान—का निर्माण होना था।


लेकिन सत्ता हस्तांतरण के समारोहों की व्यवस्था ने स्थिति को थोड़ा अलग बना दिया।


भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को दोनों नए देशों में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया में भूमिका निभानी थी। समस्या यह थी कि वे एक ही समय पर कराची और नई दिल्ली में मौजूद नहीं हो सकते थे।


पाकिस्तान की संविधान सभा का पहला अधिवेशन १० अगस्त को कराची में हो चुका था और स्वतंत्रता से संबंधित समारोह वहाँ १४ अगस्त को आयोजित किए गए। माउंटबेटन १४ अगस्त को कराची पहुँचे और पाकिस्तान की संविधान सभा में सत्ता हस्तांतरण से संबंधित समारोह में शामिल हुए।


अगले दिन, १५ अगस्त को नई दिल्ली में भारत का स्वतंत्रता समारोह हुआ।


इसलिए १४ अगस्त को पाकिस्तान में सत्ता हस्तांतरण का समारोह होना और १५ अगस्त को स्वतंत्रता की संवैधानिक प्रभावी तारीख होना—दोनों बातें एक साथ सही हो सकती हैं।


स्वयं जिन्ना ने १५ अगस्त को पाकिस्तान का जन्मदिन कहा था


इस विषय में सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणों में से एक मुहम्मद अली जिन्ना का १५ अगस्त १९४७ का संदेश है।


पाकिस्तान ब्रॉडकास्टिंग सर्विस की शुरुआत के अवसर पर जिन्ना ने १५ अगस्त को पाकिस्तान का जन्मदिन बताया था। इसका अर्थ यह है कि पाकिस्तान के शुरुआती आधिकारिक विमर्श में १५ अगस्त की तारीख को पाकिस्तान के जन्म से जोड़ा जाता था।


इसी तरह, पाकिस्तान द्वारा स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में जारी किए गए कुछ आधिकारिक दस्तावेजों और डाक टिकटों में भी १५ अगस्त १९४७ का उल्लेख मिलता है।


इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि १५ अगस्त की तारीख केवल भारत की स्वतंत्रता से जुड़ी थी और पाकिस्तान का उससे कोई संबंध नहीं था।


फिर १४ अगस्त कब और क्यों प्रमुख हो गया?


१९४८ में पाकिस्तान ने अपना स्वतंत्रता दिवस १४ अगस्त को मनाना शुरू किया और धीरे-धीरे यही तारीख आधिकारिक रूप से स्थापित हो गई।


१४ अगस्त को चुने जाने के कारणों के बारे में इतिहास में अलग-अलग व्याख्याएँ मिलती हैं।


एक प्रमुख व्याख्या यह है कि १९४७ में १४ अगस्त को रमज़ान का २७वाँ दिन था, जिसे इस्लामी परंपरा में शब-ए-क़द्र के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पाकिस्तान में इस धार्मिक महत्व को स्वतंत्रता दिवस की तारीख के साथ जोड़ने की इच्छा रही हो सकती है।


दूसरी ओर, यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान में सत्ता हस्तांतरण से संबंधित समारोह १४ अगस्त को ही आयोजित किए गए थे और कराची में पाकिस्तानी ध्वज भी उसी समय फहराया गया था।


इसलिए १४ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस बनाने के पीछे केवल एक कारण बताना सावधानीपूर्ण नहीं होगा। धार्मिक महत्व, १४ अगस्त के सत्ता हस्तांतरण समारोह और बाद की सरकारी परंपरा—इन सभी ने संभवतः इस तारीख को स्थापित करने में भूमिका निभाई।


क्या इसका मतलब पाकिस्तान १४ अगस्त को स्वतंत्र हुआ था?


इस प्रश्न का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि हम “स्वतंत्रता” से क्या मतलब ले रहे हैं।


यदि बात भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम में निर्धारित संवैधानिक प्रभावी तारीख की हो, तो १५ अगस्त १९४७ मूल तारीख थी।


यदि बात पाकिस्तान में आयोजित सत्ता हस्तांतरण के समारोह की हो, तो १४ अगस्त १९४७ महत्वपूर्ण तारीख थी।


और यदि बात आज के पाकिस्तान के आधिकारिक राष्ट्रीय दिवस की हो, तो १४ अगस्त ही पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस है।


इसलिए यह कहना कि “पाकिस्तान १४ अगस्त को आज़ाद हुआ ही नहीं था” आधा सच होगा। अधिक सटीक बात यह है कि पाकिस्तान की स्वतंत्रता से जुड़ी संवैधानिक तारीख १५ अगस्त १९४७ थी, जबकि सत्ता हस्तांतरण के समारोह १४ अगस्त को हुए और १९४८ से १४ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्थापित कर दिया गया।


एक और महत्वपूर्ण तथ्य: आज का पाकिस्तान वही क्षेत्र नहीं है जो १९४७ में था


मूल पोस्ट का अंतिम हिस्सा भी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य की ओर इशारा करता है, लेकिन उसे अधिक सटीक ढंग से समझना जरूरी है।


१९४७ में पाकिस्तान दो भौगोलिक हिस्सों में विभाजित था—पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान। दोनों हिस्सों के बीच लगभग १,६०० किलोमीटर भारतीय भूभाग था।


१९७१ के युद्ध और उसके बाद पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र होकर बांग्लादेश बना। इसलिए आज का पाकिस्तान १९४७ के पाकिस्तान के पूरे भूभाग का प्रतिनिधित्व नहीं करता।


लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि पाकिस्तान का अस्तित्व केवल किसी “सोच” के रूप में था और इसलिए उसका कोई स्थापना दिवस नहीं हो सकता। पाकिस्तान एक राजनीतिक और संवैधानिक इकाई के रूप में १९४७ में अस्तित्व में आया था। उसके निर्माण के पीछे मुस्लिम लीग की अलग राष्ट्र की राजनीतिक मांग, द्विराष्ट्र सिद्धांत, ब्रिटिश सत्ता की समाप्ति और भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन—कई ऐतिहासिक प्रक्रियाएँ थीं।


तो आखिर १४ अगस्त या १५ अगस्त?


इतिहास को एक पंक्ति में समेटें तो तस्वीर यह बनती है—


१५ अगस्त १९४७: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के अनुसार ब्रिटिश सत्ता से स्वतंत्र दो नए अधिराज्यों के अस्तित्व में आने की मूल प्रभावी तारीख।


१४ अगस्त १९४७: कराची में पाकिस्तान से संबंधित सत्ता हस्तांतरण और स्वतंत्रता समारोहों का प्रमुख दिन।


१९४८ से: पाकिस्तान ने १४ अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा स्थापित कर ली।

इसलिए १४ अगस्त को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाना कोई ऐसा तथ्य नहीं है जिसे केवल “गलत तारीख” कहकर खारिज कर दिया जाए। इसके पीछे १९४७ के वास्तविक सत्ता हस्तांतरण समारोह और बाद में बनी आधिकारिक राष्ट्रीय परंपरा दोनों मौजूद हैं।


इतिहास का दिलचस्प पक्ष यही है कि कभी-कभी एक ही घटना से जुड़ी अलग-अलग तारीखें अलग-अलग कारणों से महत्वपूर्ण हो जाती हैं। भारत के लिए १५ अगस्त स्वतंत्रता का राष्ट्रीय प्रतीक बना और पाकिस्तान के लिए १४ अगस्त।


दोनों तारीखों के पीछे १९४७ का वही निर्णायक वर्ष था— जब ब्रिटिश भारत का अंत हुआ और उपमहाद्वीप का राजनीतिक भूगोल हमेशा के लिए बदल गया।


—मूल आलेख एवं विषय-विचार: धर्मेंद्र कुमार

पुनर्लेखन, तथ्य-जाँच एवं संपादकीय प्रस्तुति: आखरवाणी संपादकीय

No comments