स्पाईवर्स
स्पाईवर्स के भीतर
स्पाईवर्स जासूसी और खुफिया अभियानों की एक काल्पनिक दुनिया है। इसकी हर कहानी अपने आप में एक पूरी कहानी है— अलग मिशन, अलग खतरा, अलग जगह और अलग परिस्थितियाँ। लेकिन इन सभी कहानियों को जोड़ता है एक संगठन और उसके एजेंटों का समूह, जिनके मिशन उन्हें भारत से लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाते हैं।
इस दुनिया के केंद्र में है इंद्रप्रस्थ इंटेलीजेंसिया—भारत की बाहरी खुफिया व्यवस्था के काल्पनिक ढाँचे के भीतर काम करने वाला एक विशेष और अपेक्षाकृत नया प्रोग्राम। इसे ऐसे अभियानों के लिए तैयार किया गया है जिनमें पारंपरिक खुफिया तरीकों से अधिक लचीलापन, गोपनीयता और त्वरित निर्णय की जरूरत होती है।
इंद्रप्रस्थ इंटेलीजेंसिया अभी कोई दशकों पुरानी स्थापित संस्था नहीं है। यह एक विकसित होता हुआ प्रोग्राम है, जिसके तौर-तरीके और कार्यक्षमता उसके एजेंटों के वास्तविक अभियानों के साथ लगातार आकार ले रहे हैं।
इसके मिशन एक जैसे नहीं होते।
कभी किसी विदेशी धरती पर किसी व्यक्ति को तलाशना होता है, कभी किसी संवेदनशील जानकारी को हासिल करना, कभी किसी संगठन में घुसपैठ करनी होती है, कभी किसी व्यक्ति को सुरक्षित निकालना होता है और कभी किसी ऐसी घटना को रोकना होता है जिसका असर कई देशों तक पहुँच सकता है।
कई बार मिशन शुरू होने के समय मामला बिल्कुल सीधा दिखाई देता है।
लेकिन मैदान में पहुँचते ही तस्वीर बदल जाती है।
जिस व्यक्ति को तलाशा जा रहा है, उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क निकल सकता है। जिस घटना को अलग-थलग अपराध समझा गया था, उसके तार किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से जुड़ सकते हैं। किसी सहयोगी पर भरोसा करना गलती साबित हो सकता है और दुश्मन समझा जाने वाला व्यक्ति किसी और के हाथों इस्तेमाल किया जा रहा हो सकता है।
यही वजह है कि स्पाईवर्स में किसी मिशन का असली स्वरूप अक्सर शुरुआत में पता नहीं चलता।
छह प्रमुख एजेंट
इंद्रप्रस्थ इंटेलीजेंसिया के फील्ड एजेंट दो स्तरों में काम करते हैं। पहले स्तर के छह एजेंट स्पाईवर्स की मुख्य कड़ी हैं—
आरव आकाश, संग्राम थापर, निहाल सिंह, रोज़ीना रय्यान, रूबी भाटिया और सबीना शाह।
छहों की अपनी अलग विशेषज्ञता, स्वभाव और काम करने का तरीका है। कोई ज्यादा आक्रामक है, कोई परिस्थितियों को पढ़ने में माहिर है, कोई मैदान में जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटता और कोई मुश्किल परिस्थितियों में ठंडे दिमाग से रास्ता निकालता है।
इन्हें आम तौर पर जोड़ी बनाकर मिशन पर भेजा जाता है।
हर मिशन के लिए जोड़ी का चुनाव उसकी जरूरत के हिसाब से होता है। किसी अभियान में अनुभव ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है, किसी में शारीरिक क्षमता, किसी में जांच-पड़ताल की समझ और किसी में दोनों एजेंटों के स्वभाव का तालमेल।
जरूरत पड़ने पर दूसरे स्तर के एजेंट और सहायक कर्मचारी भी टीम में शामिल किए जाते हैं। इनमें खुफिया जानकारी जुटाने, संचार, शोध, लॉजिस्टिक्स और दूसरी जरूरी सहायता देने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।
लेकिन मैदान में अंतिम जिम्मेदारी उन एजेंटों की होती है जिन्हें मिशन सौंपा गया है।
मिशन कभी सिर्फ मिशन नहीं रहता
किसी एजेंट को ब्रीफिंग में बताया जाता है कि उसे क्या करना है। लेकिन मैदान में पहुँचने के बाद परिस्थितियाँ उसके हिसाब से नहीं चलतीं।
किसी का पीछा करते-करते कोई दूसरी पहचान सामने आ सकती है। किसी ठिकाने की तलाशी में ऐसी जानकारी मिल सकती है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। किसी सहयोगी का व्यवहार अचानक बदल सकता है। किसी एक घटना के पीछे दूसरी घटना और उसके पीछे कोई तीसरी ताकत दिखाई दे सकती है।
ऐसे में एजेंट के सामने केवल आदेश पूरा करने की चुनौती नहीं होती। उसे बदलती परिस्थितियों के बीच यह भी तय करना पड़ता है कि आगे क्या करना है।
और यही काम स्पाईवर्स के एजेंटों को मुश्किल हालात में डालता है।
उनके पास प्रशिक्षण है, अनुभव है और खुफिया जानकारी है—लेकिन हर बार पूरी तस्वीर उनके सामने नहीं होती।
कई बार उन्हें अधूरी जानकारी के आधार पर फैसला लेना पड़ता है। कई बार यह तय करना पड़ता है कि किस पर भरोसा किया जाए। और कई बार उन्हें ऐसे विकल्पों में से एक चुनना पड़ता है जिनमें कोई भी विकल्प आसान नहीं होता।
हर कहानी की अपनी दुनिया
स्पाईवर्स की हर किताब किसी एक मिशन के इर्द-गिर्द बनी है।
किसी कहानी में एजेंट किसी व्यक्ति की तलाश में निकल सकते हैं। किसी में उन्हें किसी संगठन में घुसपैठ करनी पड़ सकती है। कहीं किसी को सुरक्षित निकालना मिशन हो सकता है, कहीं किसी संवेदनशील वस्तु या जानकारी को हासिल करना। किसी कहानी में एक छोटा-सा मामला धीरे-धीरे बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र में बदल सकता है।
इसीलिए हर किताब का माहौल और कहानी दूसरी किताब से अलग हो सकती है।
एक मिशन बर्फ से ढके पहाड़ों में चल सकता है, दूसरा किसी विदेशी शहर की गलियों में, तीसरा समुद्र के बीच और चौथा किसी ऐसे नेटवर्क के भीतर जहाँ एजेंट को अपनी पहचान तक छिपाकर रखनी पड़े।
लेकिन इन सभी कहानियों में एक चीज समान रहती है— मिशन और उसे पूरा करने वाले एजेंट।
एक किताब में संग्राम थापर और रोज़ीना रय्यान मुख्य भूमिका में हो सकते हैं, तो दूसरी में आरव आकाश और कोई दूसरा एजेंट। निहाल, रूबी और सबीना भी अलग-अलग अभियानों में अलग भूमिकाओं के साथ सामने आते हैं।
इसलिए किसी एक एजेंट का हर कहानी में होना जरूरी नहीं है।
कहानियाँ अलग, दुनिया एक
स्पाईवर्स की प्रत्येक किताब को अलग से पढ़ा जा सकता है। किसी एक मिशन को समझने के लिए जरूरी नहीं कि पाठक ने पिछली सभी किताबें पढ़ी हों।
लेकिन जो पाठक पूरी श्रृंखला के साथ आगे बढ़ता है, उसके लिए एक दूसरी परत भी खुलती जाती है।
उसे इंद्रप्रस्थ इंटेलीजेंसिया का विस्तार दिखाई देता है। एजेंटों के बीच के संबंध सामने आते हैं। पुराने मिशनों के प्रभाव कभी-कभी नए अभियानों तक पहुँचते हैं। किसी पुराने परिचित की वापसी हो सकती है, किसी पुराने निर्णय का परिणाम सामने आ सकता है और किसी पहले घट चुकी घटना की जानकारी बाद की कहानी में महत्वपूर्ण बन सकती है।
इस तरह हर किताब एक स्वतंत्र कहानी भी है और स्पाईवर्स की बड़ी निरंतरता का हिस्सा भी।
खुफिया दुनिया के दूसरे पहलू
इन कहानियों में जासूसी का मतलब सिर्फ पीछा करना, गोली चलाना या किसी गुप्त ठिकाने में घुसना नहीं है।
जानकारी भी एक हथियार है।
गलत जानकारी फैलाना, किसी की पहचान छिपाना, किसी सूचना को दबाना, किसी घटना की असली वजह तक पहुँचना, किसी संगठन के भीतर सही आदमी की तलाश करना या किसी ऐसे व्यक्ति पर नजर रखना जिसके बारे में बहुत कम जानकारी हो—ये सब किसी मिशन का हिस्सा हो सकते हैं।
कई बार एजेंट को जिस खतरे से निपटने भेजा जाता है, वह वही नहीं होता जो पहली नजर में दिखाई देता है।
और कई बार जिसे खतरा समझा जा रहा होता है, वह खुद किसी बड़े खेल का हिस्सा या मोहरा निकल सकता है।
यही कारण है कि स्पाईवर्स के मिशनों में जांच, पीछा, घुसपैठ, बचाव, कार्रवाई और खुफिया जानकारी एक-दूसरे से अलग नहीं रहतीं। एक ही अभियान में ये सभी परिस्थितियाँ सामने आ सकती हैं।
एजेंट भी इंसान हैं
इन एजेंटों की जिंदगी सिर्फ मिशनों तक सीमित नहीं है।
उनके अपने स्वभाव हैं, अपनी आदतें हैं, अपने रिश्ते हैं और अपनी कमजोरियाँ भी हैं। मैदान में लिया गया कोई फैसला उनके निजी जीवन को प्रभावित कर सकता है और कभी-कभी निजी भावनाएँ भी पेशेवर फैसलों के बीच आ सकती हैं।
आरव का तरीका संग्राम जैसा नहीं है। निहाल की कार्यशैली रूबी से अलग है। Sabina और रोज़ीना की अपनी क्षमताएँ और अपने तरीके हैं।
यही अंतर उन्हें केवल एक संगठन के कर्मचारी नहीं, बल्कि अलग-अलग व्यक्तित्व वाले किरदार बनाता है।
वे एक ही दुनिया में काम करते हैं, लेकिन हर मिशन को अपने तरीके से देखते हैं।
और फिर शुरू होता है अगला मिशन
इंद्रप्रस्थ इंटेलीजेंसिया में किसी एजेंट को केवल इसलिए मिशन नहीं दिया जाता कि मामला आसान है।
उसे इसलिए भेजा जाता है क्योंकि मामला आसान नहीं है।
उसे यह पता हो सकता है कि उसे किसे तलाशना है, क्या हासिल करना है या किसे सुरक्षित निकालना है। लेकिन उसे यह जरूरी नहीं पता होता कि मिशन खत्म होने तक उसे और क्या-क्या पता चलेगा।
किसी मिशन के पीछे दूसरा मिशन छिपा हो सकता है। किसी अपराध के पीछे कोई संगठन हो सकता है। किसी संगठन के पीछे कोई और ताकत हो सकती है। और कभी-कभी जिस व्यक्ति को एजेंट ढूँढ़ रहा होता है, वही पूरी कहानी की सबसे बड़ी पहेली बन जाता है।
स्पाईवर्स की दुनिया में हर मिशन एक नई कहानी है।
नई जगह।
नए लोग।
नया खतरा।
नई चुनौती।
लेकिन उन सभी के बीच वही छह चेहरे बार-बार लौटते हैं— आरव आकाश, संग्राम थापर, निहाल सिंह, रोज़ीना रय्यान, रूबी भाटिया और सबीना शाह।
और जब इंद्रप्रस्थ इंटेलीजेंसिया उन्हें किसी मिशन पर भेजती है, तो उन्हें सिर्फ इतना पता होता है कि उन्हें क्या करना है।
बाकी कहानी उन्हें रास्ते में पता चलती है।
1. कोड ब्लैक पर्ल
'कोड ब्लैक पर्ल’ एक खास तरह की चोरी की कहानी है, जिसे अंजाम देता है रिचर्ड किसिंजर नाम का एक डबल एजेंट— जो उस चोरी से जुड़े प्रोग्राम को लीड कर रहा था। इस चोरी के कवर अप के लिये इसे कुछ और तरह से पेश किया जाता है और किसिंजर एक खास योजना के तहत तुर्किये होते हुए फिनलैंड भाग जाता है।
उसके पीछे लग कर संग्राम और रोज़ीना भी फिनलैंड तो पहुंच जाते हैं लेकिन यह सभी लोग वहां की लोकल खींच-तान में ऐसे उलझ जाते हैं कि अपने मेन मिशन से ही भटक जाते हैं। तो क्या थी आखिर चोरी? और क्या था उस चोरी का असली उद्देश्य?
जो उन्हें सामने दिख रहा था, वह मेन खिलाड़ी नहीं था बल्कि मोहरा भर था— तो असली खिलाड़ी कौन था? और किसिंजर के पीछे लगे संग्राम और रोज़ीना, अपने पहले स्वतंत्र मिशन में कितना कामयाब हो पाते हैं उसके खिलाफ़? जानने के लिये पढ़िये— कोड ब्लैक पर्ल!
To Buy this Book, Click Here:
2. मिशन ओसावा
सरहद पार से भेजा गया है मेहमान— जो एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट है और जिसने ईराक और सीरिया तक अपनी कामयाब परफार्मेंस दे कर अपने आप को साबित भी किया है और अब जिसका काम है देश को ऐसे हमलों से दहलाना… जो दुनिया को यह दिखा सकें कि कैसे देश की सुरक्षा व्यवस्था उस एक आदमी के सामने लचर साबित हुई।
और उसे रोकने के लिये दिल्ली से चार ऐसे लोगों को लद्दाख और कश्मीर भेजा गया है, जो स्पेशल एजेंट्स के तौर पर अपना कैरियर शुरू ही कर रहे हैं— जिनका काम है उस मेहमान को डिटेक्ट करना, उसे रोकना और पकड़ना, या फिर मार देना… और चारों ने इस टास्क के पीछे अलग-अलग रूट अपनाया है।
क्या था वह रूट? क्या मेहमान अपने मकसद में कामयाब हो पाता है? या उसे रोकने में वह चारों स्पेशल एजेंट्स कामयाब रहते हैं? क्या होता है इस संघर्ष का अंजाम?
To Buy this Book, Click Here:
3. द अफ़ग़ान हाउंड
वह अफ़गानिस्तान का एक सरहदी कस्बा था— जहां अचानक ढेर से जानवरों ने हमला कर दिया और दसियों लाशें गिरा दीं, जहां मरने के पंद्रह दिन बाद सारी लाशें अपनी क़ब्रों से ग़ायब हो गईं, जहां मरने के तेईस दिन बाद सात मुर्दे ज़िंदा हो कर वापस लौटे और अपने-अपने परिवार पर क़हर बन कर टूट पड़े।
जहां क़ब्रों से गायब होने के सवा दो साल बाद सारी लाशें वापस कस्बे में बिखरी पाई गईं और जो सामने आते ही धूं-धूं कर के जल गईं, जहां आधी रात को कुछ मुर्दे घुड़सवार सैर पर निकलते थे… इन हादसों की तह तक पहुंचने में जब अफ़गान हुकूमत हर तरह से नाकाम रहती है तो हार मान कर इन घटनाओं का मुअम्मा हल करने के लिये पड़ोसी देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों की मदद लेना गवारा करती है।
और तब ‘इंद्रप्रस्थ इंटेलिजेंसिया’ की तरफ़ से एक मिशन लांच होता है— द अफ़ग़ान हाउंड… जिसका दारोमदार निहाल के कंधों पर होता है।
क्या वह इन पुरअसरार हादसों का मुअम्मा हल कर पायेगा? क्या यह हादसे आसेबी थे, या किसी किस्म की रहस्यमयी गतिविधियां, जिनके पीछे कोई गहरा राज़ छुपा हुआ था?
To Buy this Book, Click Here:
4. ऑपरेशन सालजर
साउथ चायना सी में मौजूद था एक लग्ज़री क्रूज़— जो अति विशिष्ट लोगों की मौज-मस्ती के लिये रिजर्व था और जहां साउथ चायना सी से सम्बंधित देशों के ही नहीं, भारत समेत बीस देशों के कुछ खास लोग भी मौजूद थे… अचानक एक रात हाईजैक कर लिया जाता है।
जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, इस हाईजैकिंग के उद्देश्य को ले कर लोगों की धारणाएं बदलती जाती हैं… कभी लगता है कि इस हाईजैकिंग का उद्देश्य धन उगाही था, कभी लगता है कि इसकी वजह वर्चस्व की वह राजनीति थी, जो साउथ चायना सी में चीन और अमेरिका के बीच चल रही थी।
कभी इसका ज़िम्मेदार चीन लगता है तो कभी अमेरिका। तो आख़िर क्या था इस हाईजैकिंग का उद्देश्य?
और अगर यह वाक़ई साउथ चायना सी की राजनीति से जुड़ा था तो इसके पीछे असल में कौन था? भारत इस जगह बाहरी खिलाड़ी था और उसके भेजे एजेंट्स का काम केवल अपने लोगों की सुरक्षित वापसी था, लेकिन क्या ऐसा हो पाया?
To Buy this Book, Click Here:
5. बेलियल
Belial— एक तेज़ रफ्तार, राजनीति भरा स्पाय थ्रिलर, जो दिल्ली के अँधेरे गलियारों से शुरू होकर कश्मीर की बर्फ़ीली वादियों तक फैली साज़िश खोलता है।
- केंद्र में एक बड़ा रहस्य : जाँच की कड़ियाँ बार-बार एक नाम पर रुकती हैं — एमसाना, एक ख़ुफ़िया संगठन, जिसका अस्तित्व जितना रहस्यमय है, उतना ही खतरनाक भी।
- मुख्य संदिग्ध और बहुसतही खेल: क्या सड़क पर छेड़खानी करता, अपनी दरिंदगी में तृप्ति खोजने वाला शख़्स — गैराल — वाक़ई एमसाना का सीनियर है, या सिर्फ़ एक मोहरा?
- दिल्ली से कश्मीर तक बढ़ता तनाव : मामूली घटनाएँ अचानक बड़े राजनीतिक और खुफ़िया मकसदों की तरफ़ मोड़ लेती हैं....
- तीन शक्तियाँ, तीन हित, एक मंच : कश्मीर की बर्फ़ीली चोटियाँ वो साझा मैदान हैं, जहाँ छिपे एजेंडों का मंथन हो रहा है और दुनिया की निगाहें अब तनी हुई हैं।
- थीम्स और टोन: नीति-नियंत्रण, पहचान की परतें, नैतिक जटिलताएँ और तेज़-तर्रार एक्शन....एक ऐसा अनुभव जो दिल की धड़कन बढ़ा दे।
- यदि आपको पसंद है : राजनीति, अन्तर्द्वंद और स्पाय ड्रामा — तो यह किताब आपके लिए है।
To Buy this Book, Click Here:
6. ऑरोफाइल
सिक्किम बॉर्डर। ऊँचे पहाड़, सन्नाटा… और अचानक आसमान में जन्म लेती एक रहस्यमयी रोशनी। स्पाईवर्स श्रृंखला की नई कड़ी ऑरोफाइल में इस बार मिशन की कमान संग्राम के हाथ में है। अपनी को-पार्टनर एजेंट रोज़ी के साथ वह उस संवेदनशील सीमा क्षेत्र में भेजा जाता है, जहाँ कुछ ऐसी गतिविधियाँ सामने आ रही हैं जिनका कोई स्पष्ट स्रोत नहीं है।
सीमित क्षेत्र में अचानक प्रकट होती रोशनी, उसके भीतर दिखता एक विचित्र जीव, और अगली सुबह सामने आते अपराध—इन सबने पूरे इलाके को भय और जिज्ञासा के बीच झुला दिया है। स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब इन घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने लगता है। सीमाओं पर तैनात एजेंसियाँ सक्रिय हो जाती हैं।
खोजबीन के दौरान टकराव भी होते हैं, और संदेह की दिशा बार-बार बदलती है। क्या यह किसी देश की गुप्त कार्रवाई है? या कोई तीसरी ताकत परछाइयों में बैठकर खेल रही है? जैसे-जैसे संग्राम सच्चाई के करीब पहुँचता है, उसे एहसास होता है कि यह मिशन केवल जाँच नहीं, धैर्य और रणनीति की परीक्षा है।
हर कदम पर भ्रम है, हर सुराग अधूरा। ऑरोफाइल एक तेज रफ्तार स्पाई थ्रिलर है—रहस्य, तकनीक, सीमा-राजनीति और गुप्त संगठनों के टकराव से बुनी हुई कहानी, जहाँ असली दुश्मन वही नहीं होता जो सामने दिखाई देता है।
To Buy this Book, Click Here:
7. राकस
जब पहचान ही हथियार बन जाए, तो जासूसी का खेल और खतरनाक हो जाता है।
“राकस” एक उन्नत एआई प्रोग्राम है, जो किसी भी व्यक्ति की आवाज़ और डिजिटल पहचान को हूबहू दोहरा सकता है। इसी तकनीक के सहारे राॅ से जुड़े एजेंट्स को अलग-अलग जगहों पर फंसाया जाता है, जिससे एजेंसी को शक होता है कि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।
इस मामले की जांच इंद्रप्रस्थ इंटेलिजेंसिया को सौंपी जाती है, जो अपने एजेंट्स आरव आकाश और सबीना शाह को कांगो के गोमा क्षेत्र में तैनात करती है। यह इलाका पहले से ही कई सशस्त्र गुटों के बीच संघर्ष का केंद्र है, जहाँ काम करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।
सबीना का मिशन है उस नेटवर्क तक पहुंचना जो इस एआई सिस्टम को चला रहा है और उसे खत्म करना। वहीं आरव का काम एक ऐसे एसेट से जुड़ा है, जिसकी स्थिति इस पूरे ऑपरेशन को और संवेदनशील बना देती है।
जैसे-जैसे दोनों अपने-अपने रास्तों पर आगे बढ़ते हैं, यह साफ़ होने लगता है कि यह मामला सिर्फ़ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है। इसमें कई स्तरों पर चल रहे हित, बाहरी एजेंसियों की दिलचस्पी और स्थानीय हालात शामिल हैं।
“राकस” एक ऐसी कहानी है जिसमें आधुनिक साइबर क्षमताएं और जमीनी स्तर पर होने वाले ऑपरेशन एक साथ सामने आते हैं, और हर कदम पर निर्णय की अहमियत बढ़ जाती है।
To Buy this Book, Click Here:
8. जॉली रोजर
● एक शख़्स, जो अपने लोगों में ज़िंदा भूत के रूप में मशहूर था, जिसे ले कर उसके लोगों की आम राय थी कि अगर किसी ने ग़द्दारी के विषय में सोच भी लिया तो सज़ा देने के लिये वह उसी जगह मौजूद होगा।
● एक युवती जो योरप के दूसरे सबसे बड़े अपराधिक संगठन को चलाती थी, लेकिन जिसके बारे में कोई नहीं जानता था कि वह कब, कहां और किस शक्ल में मौजूद होगी।
● एक ऐसा व्यापक अपराधिक नेटवर्क, जो बंगाल की खाड़ी से ले कर मलक्का स्ट्रेट तक, समंदर में हर जगह मौजूद था— लेकिन जिसे इस क्षेत्र का हर देश, केवल अपने देश से सम्बंधित अपराधियों का मामूली गिरोह भर समझता था।
● एक टापू, जो वीरान था लेकिन कुछ दिन के लिये पानी से ऊपर उभर आये उसके एक हिस्से ने कुछ ऐसा संकेत दे दिया था कि चीन से ले कर योरप की कुछ शक्तियों तक की दिलचस्पी उस टापू में पैदा हो गई थी।
जाॅली रोजर, वह मिशन है जो अंडमान निकोबार में चल रही कुछ संदिग्ध गतिविधियों को ले कर शुरू हुआ, जिसके तार कोको आइलैंड तक जुड़े थे— लेकिन आगे बढ़ने के साथ वह ऊपर लिखे सभी बिंदुओं के साथ उलझता गया। जानिये… क्या था असल खेल?
To Buy this Book, Click Here:



Post a Comment