क्राईम फिक्शन विद डेविड फ्रांसिस
क्राईम फिक्शन विद डेविड फ्रांसिस
यह एक किरदार के इर्द-गिर्द घूमती एक शृंखला है— जिसमें शुरुआती नौ उपन्यास किरदार की अपनी स्मृतियों के सहारे लिखी गई उसकी अतीत यात्रा है। जिसने अपने पच्चीस साल के सफ़र में ठीक से जवान होने के बाद से यूँ तो अनेक कांड किये हैं, लेकिन जिनमें से नौ उसे लगता है कि लिखे जाने लायक वे कारनामे हैं— जो उसके सनसनीखेज जीवन में सबसे अहम स्थान रखते हैं।
यह पहली नौ कहानियां सीरीज की दसवीं कहानी से पहले का वह अतीत है— जो वह पैसिफिक के एक आईलैंड पर बैठ कर याद कर रहा है, जो सहेजने योग्य है। इस अतीत में ही उसके चरित्र का विकास है। उसके साधारण से श्रेष्ठ बनने का सफ़र है। एक आम आदमी से एक शाहकार बनने की पड़ावों से भरी प्रक्रिया है। जो आदमी वर्तमान में दस गुंडों को अकेले और निहत्थे पीटने की क्षमता रखता हो— उसके अपने से कम दो मामूली लड़कों से पिट जाने की दास्तान है। इस यात्रा में डेविड के अतीत से जुड़ी वह नौ खास कहानियां हैं— जिन्होंने इस कैरेक्टर को दशा और दिशा दी है।
सीरीज का यह नायक भारत आ बसे एक योरोपियन पिता और भारतीय माँ से उत्पन्न संतान है, जो आर्थिक रूप से काफ़ी सम्पन्न है। किसी तरह जिसे बचपन से ही जासूसी किताबों और फिल्मों का चस्का लग गया और उसकी फितरत में वैसा ही कोई कैरेक्टर बनने की जो ललक पैदा हुई तो उसके व्यक्तित्व का विकास भी उसी मिज़ाज के अनुरूप होने लगा। इस आकर्षण के चलते ही जिसने शुरू से ही हर तरह की ट्रेनिंग ली, और हर तरह के तकनीकी ज्ञान में भी दक्षता हासिल की। फिर जब जवान होने और पढ़ाई पूरी होने के साथ ही माता-पिता एक रोड एक्सीडेंट में एक्सपायर हो गये, तो वह भी मुक्त हो कर अपने जेम्स बॉण्ड बनने के सफ़र पर निकल पड़ा।
लेकिन व्यवहारिक रूप से ऐसा कुछ हो पाना आसान नहीं होता। क़दम-क़दम पर पेश होने वाली मुसीबतें असल स्किल और जीजिविषा का सख़्त इम्तिहान लेती हैं— यह अलग बात है कि इन मुसीबतों से हार मान कर पीछे हटने के बजाय वह आगे बढ़ता जाता है और उसकी शख्सियत निखरती जाती है। ख़ुद को बारहा ख़तरे में डाल कर, निश्चित दिखती मौत के मुंह से अपने को वापस खींच कर, अंततः वह वैसा बनने में कामयाबी पाता है, जो वह होना चाहता था। ख़ुद को जासूसी दुनिया के किसी फिक्शनल किरदार की तरह ड्वेलप करना और दुनिया भर के अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की सोच रखना उसका एक खब्त ज़रूर था— लेकिन यही अकेला खब्त नहीं था।
उसे प्रकृति से भी कम लगाव नहीं था, वह ज़र्रे-ज़र्रे में एक अप्रतिम सौंदर्य ढूंढने का जज़्बा रखता था। उसे सब्ज़ जंगलों से प्यार था, उसे सूखे रेगिस्तानों से प्यार था, उसे गहरे समंदरों से प्यार था, उसे गर्व से सीना ताने खड़े पहाड़ों से प्यार था। वह पूरी दुनिया को घूम लेना और देख लेना चाहता था— चप्पे-चप्पे को महसूस करना चाहता था और सृष्टि रचियता की उस कारीगरी को निहारना चाहता था, जो हर जगह थी… ज़मीन के हर हिस्से में थी।
लेकिन यह दो शौक ही नहीं थे, जो उसके सर पर खब्त की तरह सवार थे, बल्कि जितनी दिलचस्पी उसे इन दोनों चीज़ों में थी, लड़कियों में उससे कम दिलचस्पी नहीं थी। औरत के मामले में उसका अपना दर्शन था— वह ज़मीन के हर हिस्से में पाई जाने वाली, हर रंग और नस्ल की औरत को भोग लेना चाहता था लेकिन ऐसे किसी रिश्ते में बंधना उसे स्वीकार नहीं था, जो उससे ज़िम्मेदारी की डिमांड करता हो। लड़कियां उसकी कमज़ोरी थीं और उसने जवान होने के बाद से ही ‘आई कांट सी ए डैमसेल इन डिस्ट्रेस’ के सिद्धांत को अपना रखा था— उसकी ज़िंदगी के ज्यादातर पंगे तो इसी सिद्धांत के चलते थे।
वह ख़ुद को नैतिक कहने या दिखाने से साफ़ बचता था और ख़ुद को हमेशा वही दिखाने की कोशिश करता था, जो रियल में वह था— लंपट मन से भरा एक ऐसा ठरकी इंसान, जिसे कुदरत से प्यार था, जिसे अपराधियों से भिड़ने की सनक थी और जो दुनिया की ज्यादातर लड़कियों को भोग लेना चाहता था। उसके ज्यादातर कांड तो किसी लड़की के पीछे ही होते थे— और जिनमें उलझ कर एक लिखी जाने लायक कहानी अपना वजूद पाती थी। अपनी दसवीं कहानी तक उसने ख़ुद को उस रूप में ढाल ही लिया था— जो वह हमेशा से ख़ुद को देखना चाहता था।
1. काया पलट
वह सात अक्तूबर की रात खार, मुंबई स्थित अपने घर में सोया था, और जब पंद्रह तारीख़ की रात वह वापस जागा था तो उसके आसपास सबकुछ बदल चुका था— न सिर्फ़ वह अपनी उम्र के पच्चीस-तीस साल पार कर गया था, बल्कि उसका शरीर भी काफ़ी हद तक बदल चुका था, वह साढ़े इक्कीस साल के युवा से, उन्चास साल का अधेड़ हो चुका था। एक आम से बंगले में सो कर वह एक आलीशान पैलेस में पहुंच गया था। जगह बदल कर मुंबई से न्यूयार्क हो चुकी थी और अब वह डेविड फ्रांसिस नाम के एक मस्तमौला युवक के बजाय न्यूयार्क के टाॅप अमीरों में शामिल राईन स्मिथ बन चुका था। अगर वह किसी की क़ैद में होता, उस पर होल्ड बनाने के लिये कोई सामने होता— तो बड़े आराम से वह इस कायापलट को उसकी साज़िश करार दे लेता, लेकिन वह आज़ाद था और उस अमीर शख़्स के सारे अधिकार रखता था। चाहता तो अगले ही दिन मुंबई वापस लौट सकता था— तो ऐसे में इस तमाशे को आख़िर किसकी साज़िश करार देता… जब ऐसा कोई साज़िशकर्ता सामने नहीं था, तो फिर यह चमत्कार हुआ कैसे?
2. ए डैमसेल इन डिस्ट्रेस
हमेशा की तरह डेविड और एक मुसीबत में फंसी लड़की का काॅम्बीनेशन— जो पैदा करता है एक रोमांच, जहां थ्रिल भी है और सस्पेंस भी।
जूही एक ऐसी लड़की थी, जिसे कुछ दिनों से उठाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन इसे ले कर उसे कोई अंदाज़ा नहीं था कि इसके पीछे कौन हो सकता है— क्योंकि न वह मनाली में रह रही थी और न वहां उसकी किसी से ऐसी दुश्मनी ही थी, न ही उसका ऐसा कोई आशिक था जो इस तरह उसे हासिल कर लेना चाहता हो।
ऐसे में उसकी मुलाकात डेविड से होती है, जो अपनी आदत से मजबूर उस डैमसेल को इस डिस्ट्रेस से निकालने की कोशिश करता है लेकिन बुरी तरह नाकाम रहता है— और इस डैमसेल को उसकी आँखों के सामने ही उठा लिया जाता है। अब उसके सर पर जूही की सुरक्षित वापसी एक कर्ज़ हो गई थी, जिसे उतारे बिना वह मनाली नहीं छोड़ सकता था।
जब वह इस केस में गहरे तक उतरता है तो कई गहरे राज़ खुलते हैं और जूही की किडनैपिंग का असल मकसद उसके सामने आता है। कौन थे उसे उठाने वाले और क्या था उसे उठाने का मकसद? क्या उन अपराधियों के बीच से वह उसे सुरक्षित निकाल पाता है? जानने के लिये पढ़िये… ए डैमसेल इन डिस्ट्रेस!
3. डार्क साइड
पैसे और ग्लैमर से भरे शो बिजनेस की एक डार्क साइड, चकाचौंध से भरी दुनिया का एक स्याह पहलू— जहां ब्लैक मनी भी थी, जहां समझौते और शोषण भी था और जहां थी एडल्ट कंटेंट के भरोसे खड़ी होती वह पैरेलल इंडस्ट्री, जो धीरे-धीरे अपनी जगह बनाती जा रही थी। इस स्याह पहलू से जुड़े लोगों में से कुछ उससे आ टकराये थे— हमेशा की तरह ए डैमसेल इन डिस्ट्रेस के भ्रम के साथ… और मुसीबत में फंसी लड़की को देख उसने भी आग में हाथ डाल दिया था। वहां— जहां मुसीबतों का ऐसा सिलसिला मौजूद था कि ख़ुद संकट मोचक ही एक के बाद एक कई बार मौत के मुंह तक पहुंच जाता है। क्या वह संकट में फंसी इस हसीना की मदद कर पायेगा, या फिर वह हसीना ख़ुद ही उसके लिये संकट साबित होगी?
4. ओरका केरास्टा
नार्वे के उत्तर में… जहां बर्फ़ के बीच कैम्पिंग कर रहे डेविड की गोद में एक आदमी हार्ट अटैक का शिकार हो कर मर जाता है— और पीछे छोड़ जाता है एक चाबी और दो शब्द… ओरका केरास्टा! अब यह उसकी ज़िम्मेदारी थी कि वह मृतक के जायज़ वारिस तक उसकी यह छोड़ी हुई चीज़ें पहुंचाए— जो उनके लिये काफ़ी अहम हो सकती थीं। लेकिन यह वारिस जो भी थे, वे ट्रोम्सो में नहीं, बल्कि ओस्लो में थे और जहां पहुंच कर उसके लिये यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि मृतक मोर्टेन सोल्हेम के उस ‘छोड़े हुए’ का जायज़ हक़दार था कौन? एक तरफ़ थी मोर्टेन की बीवी, जो उससे नफ़रत करती थी और वह मेंटली चैलेंज्ड बेटा जो किसी विरासत को संभालने के लायक नहीं था। और दूसरी तरफ़ थे एक के बाद एक कर के सामने आये वे आठ लोग, जो ख़ुद को मोर्टेन का मैनेजर और पार्टनर बताते थे और उसकी विरासत का दावा करते थे— लेकिन वे आपस में एक दूसरे के दुश्मन थे और एक दूसरे को ख़त्म कर देना चाहते थे… और जब सही वारिस चुनने की जद्दोजहद में डेविड उस चाबी और उन दो शब्दों के राज़ तक पहुंचता है तो सामने आता है एक घिनौना सच!
5. साइको सिमोन
डेविड सीरीज की पांचवीं कहानी— इस बार उत्तराखंड और हिमाचल की सरहद पर, दूर-दराज में बसे एक ऐसे आइसोलेटेड गांव में, जहां अपराध की कोई गुंजाइश नहीं थी… मगर वह डेविड ही क्या, जिसके आसपास कोई अपराध न हो। उसके पहुंचने के फौरन बाद गांव की शांत फ़िजा में किसी अपराध की गूंज सुनाई देने लगती है, एक हत्या और एक अपहरण के साथ कुछ ऐसा खेल शुरू हो जाता है, जिसे ठीक से समझना भी मुश्किल होता है, क्योंकि उस खेल में शामिल खिलाड़ियों को लेकर यह तय नहीं हो पाता कि वे इंसान थे या कुछ और।
अकेले वही नहीं थे, जो डेविड के लिये सरदर्द थे, उनसे बड़ी वह लड़की थी जो रहस्य से भरी थी। उसके साथ रह कर भी यह समझना मुश्किल होता है कि उसकी हकीक़त आखिर है क्या— क्यों उसे ख़ून देखना पसंद है, क्यों वह हर चीज़ में नुक्स देखना चाहती है और वाकई में उसे लोगों को तकलीफ़ देना पसंद था या उनसे ख़ुद तकलीफ़ पाना। किसी पल में वह एक मासूम सी लड़की होती थी और किसी पल में एक शातिर बला।
आख़िर क्यों शुरू हुआ था उस शांत गांव में अपराध का सिलसिला? कौन थे वे लोग जो वहां भूत की तरह नज़र आते थे और कुछ खोजते रहते थे? आख़िर क्या खोज रहे थे वे और ख़ुद वे रहस्यमयी लोग एक दूसरे के दुश्मन क्यों थे? क्या था सिमोन का कैरेक्टर जो डेविड के लिये एक पहेली बनी हुई थी?
6. द ब्लडी मानसून
डेविड फ्रांसिस सीरीज़ की छठी कड़ी ‘द ब्लडी मानसून’ मुंबई के अंडरवर्ल्ड के उस दौर की कहानी है, जब सत्ता की कुर्सी पर बैठा हर शख्स अपने ही साए से चौकन्ना है। शहर का अंडरवर्ल्ड एक नाम के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है—सुधाकर माने। उसका साम्राज्य व्यवस्थित है, अनुशासित है, और एक अघोषित नियम पर चलता है। लेकिन हर नियम तब तक कायम रहता है, जब तक भीतर से कोई उसे तोड़ने की हिम्मत न करे।
मुंबई में अचानक एक ऐसा गुप्त खेल शुरू होता है, जो बंद कमरों, निजी राज़ों और खामोश धमकियों पर टिका है। कुछ बड़े नाम चुपचाप इसके घेरे में आने लगते हैं। कोई खुलकर सामने नहीं आता, लेकिन शहर में बेचैनी फैल जाती है। सवाल उठता है—कौन है जो परछाइयों में बैठकर धागे खींच रहा है? और क्यों? इसी दौरान डेविड लंबे समय बाद मुंबई लौटता है।
पुराने दोस्त, पुरानी यादें और एक साधारण-सी मुलाकात—लेकिन घटनाएं अचानक ऐसा मोड़ लेती हैं कि मामला निजी हो जाता है। एक वार ऐसा होता है, जो डेविड को सिर्फ दर्शक बने रहने नहीं देता। अब यह उसके लिए पेशेवर जिम्मेदारी नहीं, एक अधूरा हिसाब है। जैसे-जैसे वह परतें खोलता है, सामने आता है कि यह खेल उतना सीधा नहीं जितना दिखता है। कुछ चेहरे भरोसेमंद लगते हैं, कुछ नाम सम्मानित, लेकिन सच इन दोनों के बीच कहीं छिपा है।
अंडरवर्ल्ड के भीतर भी हलचल है। ऊपर से मजबूत दिखने वाली दीवारों में महीन दरारें पड़ चुकी हैं। डेविड की जांच उसे उन रास्तों तक ले जाती है, जहां हर कदम पर जोखिम है। यहां दोस्ती और दुश्मनी की रेखा धुंधली है। कोई भी किसी भी वक्त पलट सकता है। और जब सच आखिरकार सामने आने लगता है, तब सवाल यह नहीं रह जाता कि अपराधी कौन है—सवाल यह बन जाता है कि इस टकराव में बचेगा कौन। ‘द ब्लडी मानसून’ अपराध, विश्वासघात और निजी प्रतिशोध की एक तीखी कहानी है, जो मुंबई के अंधेरे गलियारों से गुजरते हुए पाठक को उस बिंदु तक ले जाती है जहां हर फैसला किसी न किसी कीमत के साथ आता है।
यह वह दौर है जब शहर पर बादल सिर्फ मौसम नहीं बदलते, समीकरण भी बदल देते हैं। और जब टकराव होता है, तो उसके बाद सब कुछ पहले जैसा नहीं रहता।
7. क़स्र गुमशुदा
एक विमान दुर्घटना, एक अनजान रेगिस्तान, और एक खोज जो साधारण नहीं है।
ईराक के निनेवे प्रांत में हुई एक इमरजेंसी लैंडिंग के बाद डेविड फ्रांसिस खुद को एक ऐसे इलाके में पाता है, जहाँ न सिर्फ़ जान का खतरा है बल्कि हर कदम पर अनिश्चितता भी है। कबायली हमले से बचते हुए वह एक खोजी दल तक पहुँचता है, जो सदियों पुराने एक गुमशुदा क़स्र की तलाश में लगा है।
लेकिन यह खोज सिर्फ़ पुरातात्विक नहीं रह जाती। जैसे-जैसे टीम आगे बढ़ती है, उनके बीच छिपे हुए इरादे सामने आने लगते हैं। बाहरी ताकतों की दखल, निजी एजेंडों की टकराहट और एक ऐसे खजाने की परछाई, जो अब तक किसी के हाथ नहीं आया— ये सब कहानी को और जटिल बना देते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डेविड को अपनी समझ, साहस और फैसलों के सहारे रास्ता बनाना होता है।
“क़स्र गुमशुदा” एक तेज़ रफ्तार थ्रिलर है, जिसमें एक्शन, रहस्य और अप्रत्याशित मोड़ लगातार कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
8. सिकारियो
मैक्सिको के ड्रग कार्टेल्स के बीच पैदा हुई एक कहानी… जो एक साधारण सी मुलाक़ात से शुरू होती है और धीरे-धीरे डेविड की जान का बवाल बन जाती है। न चाहते हुए भी वह इस खेल में एक मोहरा बन जाता है और एक के बाद एक ऐसे मौके आते हैं कि बिगड़ते हालात के बीच जीवन में पहली बार उसे इस जंजाल से निकल भागने का फैसला करना पड़ जाता है। यहां तक कि वह अपने तय किये नियम के खिलाफ़ जाते हुए डैमसेल को डिस्ट्रेस में ही छोड़ कर निकल जाना चाहता है।
लेकिन भागना आसान नहीं था… एक तरफ़ थे कार्टेल के लोग, जिन्होंने उसके सर पर ईनाम तक घोषित कर दिया था, एक तरफ़ थे ऐसे लोग जो पर्दे के पीछे थे मगर खेल के मुख्य खिलाड़ी वही थे, एक तरफ़ था एक ऐसा भ्रष्ट पुलिस वाला जो लोगों को वीभत्स तरीके से मारना अपनी आर्ट समझता था और एक तरफ़ थी एक ऐसी लेडी सिकारियो, जो धुंध थी, कोहरा थी— अंधेरे में छुपी फुसफुसाहट थी।
वह चाह कर भी भाग नहीं पाता तो फिर इस खेल में शामिल हो जाता है और खेल को उस अंत तक पहुंचा कर ही छोड़ता है, जहां जाने कितनी लाशें गिर गई थीं। क्या था यह खेल और कौन थे असल खिलाड़ी? क्या हश्र होता है इस खेल में डेविड का?
9. स्याह-सफ़ेद
डेविड फ्रांसिस सीरीज का नवां शाहकार… पाकिस्तान की धरती पर फैली वह कहानी, जिसमें हर तरफ़ एक ख़तरा है, एक साज़िश है और एक छुपा हुआ सच— जो जानलेवा है।
किसी डैमसेल इन डिस्ट्रेस की खोज इस बार उसे एक ऐसी औरत की चौखट पर ले जा कर खड़ा कर देती है— जहां से एक साज़िश का दरवाज़ा खुलता है। इस चौखट से पार होते ही वह जैसे साज़िशों के भंवर में फंस जाता है।
एक मिशन, जिसका असल मक़सद पर्दे में था लेकिन जिसमें ढेर से लोग मोहरों की तरह इस्तेमाल हो रहे थे। एक मज़लूम औरत की मदद के पीछे शुरू हुआ वह सिलसिला जो आगे बढ़ने के साथ हर क़दम पर जानलेवा होता गया और जिसने अपने अंत तक पहुंचते ढेरों लाशें गिरा दीं।
पेशावर से लेकर स्वात के पीओचार तक— और मुजफ्फराबाद से ले कर नीलम वैली तक फैली वह कहानी, जिसके तार पाकिस्तान आर्मी, आईएसआई से लेकर आईएसकेपी और टीटीपी तक से जुड़े थे और चार पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ़ अपना-अपना खेल खेलने में लगी थीं— जिसमें लगातार लोग मारे जा रहे थे।
इस खेल में पांचवी पार्टी था डेविड, जो अपनी जबरन पंगे लेने की आदत के चलते गहरे तक फंस गया था। यहां हर पार्टी उसे बकरा बना कर इस्तेमाल करने में लगी थी। यहां तक कि वह औरतें भी, जिन्हें वह ख़ुद मज़लूम समझ रहा था। यहां जैसे हर कोई दोहरा किरदार रखता था। जैसे कोई अपना एक अलग खेल ही खेलने में लगा हुआ था।
ड्रग और वैपंस स्मगलिंग से ले कर आतंकी हमले और पैसों की लूट के बीच उलझी एक ऐसी कहानी, जो मैक्सिको के बाद डेविड के जीवन का सबसे बड़ा कांड बन गई थी। क्या था असल सच, जो पर्दों में छुपा था? क्या था वह असली मिशन, जिसमें कई लोग मोहरों की तरह इस्तेमाल हो रहे थे? क्या था उस पैसे का रोल, जो ढेरों जानें लेने वाला था— और क्या था यह ‘स्याह-सफ़ेद’ कोड? जानने के लिये पढ़िये।
10. डेढ़ सयानी
डेढ़ सयानी— कहानी है एक ऐसी मजलूम लड़की एना की, जिसे करोड़ों की प्रापर्टी की मालकिन होने का अभिशाप तब से भुगतना पड़ा था जब उसने ठीक से होश भी नहीं संभाला था। हर तरह ज़ोर-ज़ुल्म और शोषण झेलते वह इस तरह बड़ी हुई थी कि कोई आत्मविश्वास और आत्मसम्मान उसमें बाकी न बचे और वह पिता की इच्छाओं के नाम पर एक कठपुतली जैसा जीवन गुज़ारती रहे... लेकिन फिर भी उसने बग़ावत की थी और हालात को अपने हिसाब से बदलने की कोशिश की थी।
अपनी तकदीर को बदलने और संवारने के लिये उसने डेविड नामी उस मस्तमौला मुंबईया छोकरे का सहारा लिया था जिसकी जिंदगी ही तीन पिलर्स पर टिकी थी... कुदरत से बेपनाह प्यार और अंतहीन यायावरी, दुनिया भर की औरतों को भोगने की अदम्य ख्वाहिश और दुनिया के हर अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाने की सनक— जिसके चलते उसकी ज़िंदगी में हमेशा अनिश्चितता और हंगामा बना रहता था और उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं थी।
लेकिन दोनों को जिस वागले से छीन कर यह आज़ादी हासिल करनी थी— वह न सिर्फ एक रसूख और पैसे वाला शख़्स था, बल्कि अपराधिक मनोवृत्ति वाला, हर तरह के अपराधों से लिप्त एक दबंग शख़्स भी था जिसके पॉलिटिकल कनेक्शंस भी ऐसे थे कि सरकार भी उस पर सीधे हाथ डालने से कतराती थी। जाहिर है कि ऐसे शख्स से अपनी आजादी हासिल कर पाना न एना के लिये आसान था और उससे पार पा पाना डेविड के लिये ही आसान था... मगर जब ठान लिया था तो करना ही था— आखिर उसकी रूह को तस्कीन देने वाली तीनों वजहें एक साथ वहां मौजूद थीं... गोवा का मनमोहक सौंदर्य, एना, एली और जीनिआ जैसी हसीनाओं का सान्निध्य और वागले के रूप में एक ऐसा सशक्त अपराधी, जो उसका भरपूर इम्तिहान लेने वाला था।

Post a Comment